पूर्व IAS अभिषेक ने दिया टिप्स: माशूका जैसा प्यार UPSC से होता, तो प्रोफेसर को पता ही नहीं चलता और बन जाते IAS
पूर्व आईएएस अभिषेक सिंह ने बीएचयू में छात्रों को कॅरिअर निखारने की टिप्स दी। उन्होंने कहा कि माशूका को छिपा लेते हो, लेकिन यूपीएससी तैयारी की जानकारी सबको हो जाती है। तुम गर्लफ्रेंड से प्यार करते हो, यूपीएससी से नहीं। हमें इसका उलटा कर तैयारी करनी होगी।
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माशूका जैसा प्यार यूपीएससी से होता, तो प्रोफेसर को पता ही नहीं चलता, परीक्षा में बैक नहीं लगता और तुम आईएएस बन जाते। ये मोटिवेशन पूर्व आईएएस और जौनपुर के अभिषेक सिंह ने बीएचयू में छात्र संवाद के दौरान दी। छात्र का सवाल था कि प्रोफेसर को पता चल गया कि यूपीएससी की तैयारी कर रहा हूं, तो उन्होंने परीक्षा में मेरा बैक लगा दिया।
पूर्व आईएएस अभिषेक ने कहा कि माशूका को छिपा लेते हो, लेकिन यूपीएससी तैयारी की जानकारी सबको हो जाती है। तुम गर्लफ्रेंड से प्यार करते हो, यूपीएससी से नहीं। हमें इसका उलटा कर तैयारी करनी होगी। अभिषेक ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आपकी भूख जितनी ज्यादा होगी, वैसा ही भोजन खाते हो। ठीक ऐसा ही कुछ करने की भूख ज्यादा तो लक्ष्य भी वैसा ही बन जाता है।
बीएचयू के विज्ञान संस्थान के महामना सेमिनार हॉल में शनिवार को हिंदी प्रकाशन समिति का संवाद कार्यक्रम था। अभिषेक सिंह, डीन प्रो. एसके उपाध्याय, मधु तपाड़िया और संयोजक जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने अचिंत्य पत्रिका का लोकार्पण किया। इसे तैयार करने में 50 फीसदी योगदान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। लेख और संपादन का काम मौलिक है। संपादन देवांश पांडेय और निधि की टीम ने किया है।
सफल और असफल इंसान में सिर्फ सोच का फर्क होता है। परीक्षा में बोलते हैं कि सवाल बहुत कठिन था। लेकिन सवाल तो सवाल होता है, आपको आता नहीं था। समझ नहीं आता कि ऐसा कठिन परिश्रम करने के बावजूद परीक्षा क्यों नहीं पास कर पाए। भाई कठिन है तो पढ़ ही क्यों रहे। मूवी देखते समय कोई कठिन परिश्रम थोड़ी करता है।
कॅरिअर चुनना है तो वही चुनिए जो पसंद है। नहीं तो हमेशा कठिन ही लगेगा। बड़े लोगों को देखा होगा कि उन्हें संडे मंडे से फर्क नहीं पड़ता। काम ही उनका मनोरंजन है। क्योंकि वे मन पसंद काम कर रहे हैं। किसी और की बात सुनकर बात आगे बढ़ा दी तो आप किसी और की जिंदगी जिएंगे और उनकी कही बातों को सुनकर चले जाओगे। सफलता नहीं मिली यानी वो काम नहीं कर रहे थे जो वास्तव में करना है।
10 साल पहले के छपरी अब लाखों के इंफ्लूएंशर्स हैं
आज से 10 साल पहले सोशल मीडिया पर इंफ्लूएंशर्स को छपरी कहा गया। आज वही छपरियों का दल हर महीना 10 लाख कमाई कर रहा। अमेरिका और इंग्लैंड से पढ़ने वाले बिजनेस मैन अपने ब्रांड के प्रचार में इन छपरियों को पकड़ रहे हैं। क्योंकि उन्होंने ब्रांड को विवश कर दिया कि आओ हमें पैसे दो। पहले आप ही एक काम करो, उसी में मास्टर बना, लेकिन अब आप कई काम कर सकते हैं।
आपका काम हो जाए और इगो भी हर्ट न
सामने वाले से ऐसे बात करो कि उसकी इगो हर्ट न हो। यूपीएससी की ट्रेनिंग में यही सिखाया जाता है कि आपका काम भी हो जाए और बुरा भी न लगे। विवेकानंद ने कहा है कि हमें 100 लीडर दे दो, हम देश की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख देंगे। लेकिन कुछ लोग ऐसा करते हैं कि स्वामी जी ने कहा है तो चलो ये बन जाता हूं। जबकि ऐसे नहीं होगा। आपको अपने मन का काम करना होगा।