सात समंदर पार से आए दूल्हा आसिम ने दुल्हन आन को वरमाला पहनाकर सिंदूर से मांग भरी। हिन्दू रीति रिवाजों को समझा और अग्नि के सात फेरे लेकर एक दूसरे का सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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जर्मन दंपती ने गंगा किनारे रचाई शादी
- फोटो : अमर उजाला
उन लोगों ने 2002 में पहले जर्मनी में शादी की थी लेकिन भारतीय परंपरा से लगाव होने के कारण 15 साल बाद उन्होंने दोबारा हिंदू रीति रिवाज से शादी करने का फैसला किया।
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वाराणसी के मीरघाट पर स्थित एक लॉज में इस जर्मन दंपती की शादी के दौरान काफी संख्या में लॉज के लोग मौजूद रहे और रस्म में भागीदारी निभाई। मीरघाट स्थित लॉज में अग्नि कुंड के सामने शहनाईयों और वैदिक मंत्रोच्चार की मंगलध्वनि के बीच शादी आरंभ हुई।
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होटल संचालक विकास मेहरोत्रा ने कन्यादान की रस्म निभाई। होटल व्यवसायी आसिम की यह पहली और आन की दूसरी शादी है। आन को पहली शादी से एक बेटा भी है। आसिम ने कहा कि उसे भारतीय संस्कृति से बहुत प्रेम है।
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आन ने बताया कि वह दोनों जर्मनी में भारतीय रेस्टोरेंट चलाते हैं जिससे कि किसी को भारतीय भोजन के लिए परेशान न होना पड़े। आज गंगा किनारे विवाह करके यह महसूस हुआ कि हम लोग जीवन भर के लिए एक दूसरे के साथ रहेंगे।