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खाना-पानी, दूध-दवाई, सब कुछ हवा-हवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 26 Aug 2016 02:30 AM IST
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गंगा की बाढ़ से घिरे ढाब क्षेत्र आधा दर्जन गांवों के लोग खाना-पानी, दवा और बच्चों के लिए दूध तक को तरस रहे हैं। इन गांवों में केवल एक बार लंच पैकेट पहुंचते हैं। इसी में उन्हें चौबीस घंटे तक गुजारा करना पड़ रहा है। रामपुर गांव में तो निर्देश के बाद भी भोजन नहीं बन रहा। गुरुवार को इन गांवों में हालात का जायजा लेने पहुंचे डीएम विजय किरन आनंद को ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा सुनाई। इस पर डीएम ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई और तत्काल राहत व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया। वहीं, गोमती और नाद नदी के पानी से घिरे गांवों में भी मुसीबतें कम नहीं हैं। वहीं, शहरी क्षेत्र के राहत शिविरों में भी अव्यवस्थाओं का सिलसिला उच्चाधिकारियों के तमाम दिशा-निर्देश के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
चिरईगांव क्षेत्र में बाढ़ से घिरे गोबरहा, मोकलपुर, रमचंदीपुर और मुस्तफाबाद आदि गांवों में गुरुवार को डीएम ने दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि उन्हें चौबीस घंटे में केवल एक बार लंच पैकेट मिल रहे हैं। वह भी दोपहर के बाद पहुंचते हैं। बच्चों को दूध, दवाओं और चिकित्सकों का कोई इंतजाम नहीं है। इस पर डीएम ने अधिकारियों एसडीएम पिंडरा, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो और एडीओ पंचायत, एडीओ सहकारिता को फटकार लगाई। उन्होंने नायब तहसीलदान को लेखपालों, अमीनों, किसान सहायकों और सहायक विकास अधिकारियों को तैनात करने को कहा। साथ ही सीएमओ को गांवों में चिकित्सकों की टीम भेजने का निर्देश दिया।
वहीं, रामपुर गोबरहा में लोगों ने बताया कि यहां खाना ही नहीं बन रहा। इस पर डीएम ने लेखपाल और प्रधान पुत्र को डांटते हुए दो घंटे के भीतर बाढ़ पीड़ितों को खाना मुहैया कराने का निर्देश दिया। चांदपुर ग्राम प्रधान प्रमोद यादव और रमचंदीपुर के प्रधान राजकुमार ने पूरा क्षेत्र जलमग्न होने से पशुओं के लिए भूसा मुहैया कराने की मांग की। चौबेपुर संवाददाता के अनुसार गोमती और नाद नदी के पानी से घिरे अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, मठिया, भगवानपुर, कुर्सिया, टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर, राजवारी, धौरहरा आदि गांवों में भी सरकारी मदद नाकाफी साबित हो रही है। खाने-पीने और बीमारों के इलाज की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। चारे के संकट से दो पशुओं की मौत हो गई है। बाढ़ में डूबे पिपरी गांव की हालत और बदतर है। गंगा किनारे के शिवदशां, लुठा, परनापुर, मुरीदपुर, गौरा उपरवार, चंद्रावती, कैथी, ढकवा, सरसौल, छितौना, अंबा, अमौली और कुकुढहां के लोग भी बाढ़ से परेशान हैं। रोहनिया संवाददाता के अनुसार करसड़ा, बेटावर, अक्षयवर आदि गांवों में एसडीएम त्रिभुवन राम ने दौरा किया और ग्रामीणों को राहत सामग्री मुहैया कराई। करसड़ा में गंगा की बाढ़ से सड़क के कटान को रोकने के उपाय कराए गए।
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चिरईगांव क्षेत्र में बाढ़ से घिरे गोबरहा, मोकलपुर, रमचंदीपुर और मुस्तफाबाद आदि गांवों में गुरुवार को डीएम ने दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि उन्हें चौबीस घंटे में केवल एक बार लंच पैकेट मिल रहे हैं। वह भी दोपहर के बाद पहुंचते हैं। बच्चों को दूध, दवाओं और चिकित्सकों का कोई इंतजाम नहीं है। इस पर डीएम ने अधिकारियों एसडीएम पिंडरा, नायब तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो और एडीओ पंचायत, एडीओ सहकारिता को फटकार लगाई। उन्होंने नायब तहसीलदान को लेखपालों, अमीनों, किसान सहायकों और सहायक विकास अधिकारियों को तैनात करने को कहा। साथ ही सीएमओ को गांवों में चिकित्सकों की टीम भेजने का निर्देश दिया।
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वहीं, रामपुर गोबरहा में लोगों ने बताया कि यहां खाना ही नहीं बन रहा। इस पर डीएम ने लेखपाल और प्रधान पुत्र को डांटते हुए दो घंटे के भीतर बाढ़ पीड़ितों को खाना मुहैया कराने का निर्देश दिया। चांदपुर ग्राम प्रधान प्रमोद यादव और रमचंदीपुर के प्रधान राजकुमार ने पूरा क्षेत्र जलमग्न होने से पशुओं के लिए भूसा मुहैया कराने की मांग की। चौबेपुर संवाददाता के अनुसार गोमती और नाद नदी के पानी से घिरे अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, मठिया, भगवानपुर, कुर्सिया, टेकुरी, लक्ष्मीसेनपुर, राजवारी, धौरहरा आदि गांवों में भी सरकारी मदद नाकाफी साबित हो रही है। खाने-पीने और बीमारों के इलाज की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। चारे के संकट से दो पशुओं की मौत हो गई है। बाढ़ में डूबे पिपरी गांव की हालत और बदतर है। गंगा किनारे के शिवदशां, लुठा, परनापुर, मुरीदपुर, गौरा उपरवार, चंद्रावती, कैथी, ढकवा, सरसौल, छितौना, अंबा, अमौली और कुकुढहां के लोग भी बाढ़ से परेशान हैं। रोहनिया संवाददाता के अनुसार करसड़ा, बेटावर, अक्षयवर आदि गांवों में एसडीएम त्रिभुवन राम ने दौरा किया और ग्रामीणों को राहत सामग्री मुहैया कराई। करसड़ा में गंगा की बाढ़ से सड़क के कटान को रोकने के उपाय कराए गए।
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