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Varanasi News: मियावाकी तकनीक से शहर में तैयार होंगे पांच जंगल
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शहर की हवा में सुधार करने की तरफ एक कदम
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। जापान की मियावाकी पद्धति जिले की हवा में सुधार होगा। शहर में हरियाली और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वन विभाग ने इसे लागू करने की रणनीति तैयार की है। पहले चरण में रमना एसटीपी में एक हेक्टेयर का चयन हो गया है। साथ ही चार और स्थलों की तलाश की जा रही है।
वाराणसी सर्किल में 2019 के सापेक्ष 2021 में 3.75 प्रतिशत हरियाली क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई । यह बढ़ोतरी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की प्रत्येक दो वर्ष पर जारी होने वाली रिपोर्ट में सामने आई है। प्रभागीय वनाधिकारी प्रवीण खरे ने बताया कि जंगलों को देखते हुए यह रिपोर्ट जारी की जाती है। प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से मिशन मोड में पौधारोपण अभियान चला रही है। जिससे अधिक हरियाली हो सके। शहर के हर हिस्से में छोटे-छोटे प्राकृतिक जंगल तैयार होंगे।
एक हेक्टेयर में लगेंगे 30 हजार पौधे
एक हेक्टेयर में आमतौर पर 1100 पौधे लगते हैं। वहीं, मियावाकी पद्धति से एक हेक्टेयर में 30 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। हाई डेंसिटी प्लांटेशन से बहुत कम समय में प्राकृतिक जंगल लहलहा उठेगा। यह बनारस की बिगड़ती हवा को सुधारने में बेहद मददगार साबित होगा। इससे जल, मृदा संरक्षण के साथ पशु-पक्षियों को प्राकृतिक आवास भी मिल जाएंगे।
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ये है मियावाकी पद्धति
जापानी वनस्पति विज्ञानी डॉ. मियावाकी ने पौधरोपण की इस पद्धति को विकसित किया है। इस विधि से कम जगह और कम समय में अधिक घनत्व वाले जंगल तैयार किए जा सकते हैं। पद्धति के अनुसार, पहले स्थानीय पौधों की सूची तैयार की जाती है। रोपण में प्रजाति का चयन इस तरह किया जाता है कि कम रोशनी में तैयार होने वाली कम ऊंचाई की प्रजाति, मध्यम रोशनी में बढ़ने वाली मध्यम ऊंचाई की प्रजाति और ज्यादा रोशनी में जीने वाले ऊंची प्रजाति के पौधे रोपे जाते हैं।
आप भी वन विभाग से जान सकते हैं तकनीक
डीएफओ ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो साल भर में यह जंगल तैयार हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर प्राकृतिक जंगल तैयार करवाना चाहता है तो वह वन विभाग से संपर्क कर सकता है। उसे भी पूरी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
वाराणसी। जापान की मियावाकी पद्धति जिले की हवा में सुधार होगा। शहर में हरियाली और वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वन विभाग ने इसे लागू करने की रणनीति तैयार की है। पहले चरण में रमना एसटीपी में एक हेक्टेयर का चयन हो गया है। साथ ही चार और स्थलों की तलाश की जा रही है।
वाराणसी सर्किल में 2019 के सापेक्ष 2021 में 3.75 प्रतिशत हरियाली क्षेत्र में बढ़ोतरी हुई । यह बढ़ोतरी इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट की प्रत्येक दो वर्ष पर जारी होने वाली रिपोर्ट में सामने आई है। प्रभागीय वनाधिकारी प्रवीण खरे ने बताया कि जंगलों को देखते हुए यह रिपोर्ट जारी की जाती है। प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से मिशन मोड में पौधारोपण अभियान चला रही है। जिससे अधिक हरियाली हो सके। शहर के हर हिस्से में छोटे-छोटे प्राकृतिक जंगल तैयार होंगे।
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एक हेक्टेयर में लगेंगे 30 हजार पौधे
एक हेक्टेयर में आमतौर पर 1100 पौधे लगते हैं। वहीं, मियावाकी पद्धति से एक हेक्टेयर में 30 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। हाई डेंसिटी प्लांटेशन से बहुत कम समय में प्राकृतिक जंगल लहलहा उठेगा। यह बनारस की बिगड़ती हवा को सुधारने में बेहद मददगार साबित होगा। इससे जल, मृदा संरक्षण के साथ पशु-पक्षियों को प्राकृतिक आवास भी मिल जाएंगे।
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ये है मियावाकी पद्धति
जापानी वनस्पति विज्ञानी डॉ. मियावाकी ने पौधरोपण की इस पद्धति को विकसित किया है। इस विधि से कम जगह और कम समय में अधिक घनत्व वाले जंगल तैयार किए जा सकते हैं। पद्धति के अनुसार, पहले स्थानीय पौधों की सूची तैयार की जाती है। रोपण में प्रजाति का चयन इस तरह किया जाता है कि कम रोशनी में तैयार होने वाली कम ऊंचाई की प्रजाति, मध्यम रोशनी में बढ़ने वाली मध्यम ऊंचाई की प्रजाति और ज्यादा रोशनी में जीने वाले ऊंची प्रजाति के पौधे रोपे जाते हैं।
आप भी वन विभाग से जान सकते हैं तकनीक
डीएफओ ने बताया कि सब कुछ ठीक रहा तो साल भर में यह जंगल तैयार हो जाएंगे। अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन पर प्राकृतिक जंगल तैयार करवाना चाहता है तो वह वन विभाग से संपर्क कर सकता है। उसे भी पूरी तकनीकी जानकारी दी जाएगी।