यूपी: 'न निकाह किया न कभी पढ़ी नमाज', 40 साल पहले दुलारी बन गई थी रजिया, फिर भी 2012 में बनवाया ये प्रमाण पत्र
यूपी के सोनभद्र के बघाड़ू के रहने वाली रजिया 40 साल पहले दुलारी बन गई थी। 2012 में उसने एसटी का प्रमाण पत्र बनवा लिया था। प्रमाणपत्र के आधार पर आदिवासियों की जमीन खरीदी गई। जिला स्तरीय समिति ने प्रमाण-पत्र को गलत बताया और निरस्त कर दिया।
विस्तार
सोनभद्र के बघाड़ू निवासी बहादुर अली से शादी के बाद 40 साल पहले रजिया बनी दुलारी खुद को जनजाति समाज का होने का दावा करती रही। वर्ष 1986 में झारखंड में दोनों ने कोर्ट मैरिज की। इसके 26 साल बाद वर्ष 2012 में रजिया ने अनुसूचित जनजाति (एसटी) का प्रमाणपत्र बनवा लिया था।
इसी के आधार पर आदिवासियों की जमीन खरीदे जाने का दावा किया गया। मामले की जांच जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने की। साथ ही प्रमाणपत्र को गलत पाते हुए जुलाई में ही निरस्त कर दिया।
न निकाह किया न मस्जिद गई और न कभी पढ़ी नमाज
जांच के दौरान रजिया की ओर से दावा किया गया कि उसने बहादुर अली से कभी निकाह नहीं किया, न नमाज अदा की और न ही कभी मस्जिद गई। उसने खुद को हिंदू बताया। वहीं, प्रधान अब्दुल्ला अंसारी, बीडीसी और तीन ग्राम पंचायत सदस्यों समेत 11 लोगों के बयानों में रजिया के मुस्लिम धर्म अपनाने और उससे जुड़े रीति-रिवाजों का पालन करने की बात कही गई।
समिति की जांच में सामने आया कि रजिया मुस्लिम धर्म के रीति-रिवाजों का पालन कर रही है। उसके बेटों के नाम भी उसी आधार पर रखे गए हैं। दर्ज बयानों में उसे पनिका समाज से बहिष्कृत किए जाने का भी दावा किया गया। इन तथ्यों के आधार पर जिला स्तरीय समिति ने 14 दिसंबर, 2012 को जारी एसटी प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया।
जिला स्तरीय समिति के अध्यक्ष डीएम हैं। जिला समाज कल्याण अधिकारी सचिव हैं। समिति की पड़ताल में आए दावे और तथ्यों के आधार पर प्रमाण पत्र निरस्त किया गया है। समिति के मुताबिक, रजिया का दावा था कि उसने बहादुर अली के सामने प्रस्ताव रखा था कि वह उसके साथ बतौर पत्नी रहेगी लेकिन अपना धर्म-जाति नहीं छोड़ेगी। इसी क्रम में 1986 में दोनों के बीच सहमति पत्र भी रजिस्टर्ड कराया गया।
बहादुर अली का बयान था कि वर्ष 1986 में दोनों गढ़वा (बिहार) के रजिस्ट्रार के समक्ष पेश हुए और पति-पत्नी के रूप में जीवन बिताने का फैसला लिया। जमीन खरीदने से पहले जाति प्रमाणपत्र बनवाने की आवश्यकता पड़ी तो उसने रजिया का पिछड़ी जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया लेकिन तहसील अधिकारी-कर्मचारी ने जांचोपरांत अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
राजस्व टीम पहुंची बघाड़ू, तब सच आया सामने
दंपती के दावों का सच जानने किए राजस्व टीम बघाड़ू पहुंची तो प्रधान अब्दुल्ला अंसारी ने पुष्टि की कि रजिया मुस्लिम रीति-रिवाज का पालन करती है। त्योहार भी मनाए जाते हैं। बीडीसी लोकनाथ, ग्राम पंचायत सदस्य बिहारी आदि ने भी दावा किया कि वह मुस्लिम त्योहार, रीति-रिवाज का पालन करती है। उसका पहनावा मुस्लिम महिलाओं की तरह है। वह हिंदू धर्म के रीति-रिवाज, त्योहारों को नहीं मनाती।
एसटी प्रमाणपत्र के लिए जनजातीय पहचान के आवश्यक गुण जरूरी : सत्यापन टीम
जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के निर्णय में कहा गया कि अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र के लिए आवेदक में जनजातीय पहचान के आवश्यक गुण होने चाहिए। इसमें प्रथागत रीति-रिवाज, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और संबंधित जनजातीय समुदाय की स्वीकृति शामिल हैं। यदि धर्मांतरण या बाद के किसी आचरण के चलते जनजातीय जीवन शैली से पूर्ण अलगाव हो जाता है। समुदाय से मिलने वाली मान्यता खत्म हो जाती है तो अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त करने का मूल आधार भी समाप्त माना जाएगा।
जिला स्तरीय सत्यापन समिति के निर्देश पर रजिया का जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है। संबंधित को इसकी जानकारी भी दे दी गई है।-अंजनी कुमार गुप्ता, तहसीलदार।
बघाड़ू में 2026 में बूथवार मतदाता
| बूथ | कुल मतदाता | मुस्लिम | हिंदू |
|---|---|---|---|
| 255 | 919 | 25 | 894 |
| 256 | 854 | 86 | 768 |
| 257 | 936 | 249 | 687 |
| 258 | 907 | 109 | 798 |
| 259 | 907 | 433 | 474 |
वर्ष 2003 में स्थिति
| बूथ | कुल मतदाता | मुस्लिम | हिंदू |
|---|---|---|---|
| 270 | 1578 | 203 | 1377 |
| 269 | 978 | 227 | 751 |
| 268 | 736 | 0 | 736 |