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Varanasi News: डेढ़ सौ हेक्टेयर में तरबूज की खेती कर किसान बढ़ाएंगे आय
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मिर्जापुर। जायद के दिनों में किसान के खेत खाली नहीं रहेंगे। किसान खेतों में तरबूज की खेती कर अपनी आय दो गुनी कर सकते हैं। उद्यान विभाग की पहल पर किसान सूक्ष्म सिंचाई के सहारे पथरीली जमीन पर तरबूज की खेती कर रहे हैं।
राजगढ़ तथा पटेहरा विकास खंड में उद्यान विभाग की ओर से लगभग 150 में तरबूत की खेती की शुरूआत की गई है। फरवरी से मार्च माह के बीच तरबूज की खेती करने में प्रति बीघा 10 से 12 हजार खर्च आता है। इसके बाद किसानों को 80 से 90 हजार प्रति बीघा आय होने की संभावना रहती है। गर्मी के दिनों में तरावट देने वाले ऐसे फलों की मांग भी बढ़ जाती है। तरबूज बड़े आकार के होंगे। ऐसे में किसानों को उपज को लेकर कहीं भटकने की भी जरूरत नहीं होगी। उद्यान विभाग के माध्यम से व्यापारी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचकर उपज उठाएंगे। जिला उद्यान अधिकारी मेवा राम का कहना है कि तरबूज की खेती फरवरी से मार्च महीने के मध्य की जाती है। गर्मी शुरू होने तक इसमें फल लगने लगते हैं। तरबूज की खेती के लिए किसान मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पटेहरा तथा बिसुंदरपुर में बीज देकर स्वयं पौधे तैयार करा रहे हैं। वहां उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार हो रहे हैं। इससे ज्यादा वजन और बड़े आकार के तरबूज का उत्पादन होगा।
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राजगढ़ तथा पटेहरा विकास खंड में उद्यान विभाग की ओर से लगभग 150 में तरबूत की खेती की शुरूआत की गई है। फरवरी से मार्च माह के बीच तरबूज की खेती करने में प्रति बीघा 10 से 12 हजार खर्च आता है। इसके बाद किसानों को 80 से 90 हजार प्रति बीघा आय होने की संभावना रहती है। गर्मी के दिनों में तरावट देने वाले ऐसे फलों की मांग भी बढ़ जाती है। तरबूज बड़े आकार के होंगे। ऐसे में किसानों को उपज को लेकर कहीं भटकने की भी जरूरत नहीं होगी। उद्यान विभाग के माध्यम से व्यापारी सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचकर उपज उठाएंगे। जिला उद्यान अधिकारी मेवा राम का कहना है कि तरबूज की खेती फरवरी से मार्च महीने के मध्य की जाती है। गर्मी शुरू होने तक इसमें फल लगने लगते हैं। तरबूज की खेती के लिए किसान मिनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पटेहरा तथा बिसुंदरपुर में बीज देकर स्वयं पौधे तैयार करा रहे हैं। वहां उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार हो रहे हैं। इससे ज्यादा वजन और बड़े आकार के तरबूज का उत्पादन होगा।
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