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एलिवेटेड कॉरिडोर: दो महीने में पूरा हुआ 89 किमी का सर्वे, अक्तूबर में शासन को जाएगी रिपोर्ट; यह प्रक्रिया शुरू

Fri, 11 Sep 2026 06:12 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 11 Sep 2026 06:12 AM IST
सार

दो महीने में एलिवेटेड कॉरिडोर के प्रस्तावित 89 किमी मार्ग का सर्वे पूरा हो गया है। सभी गांवों में सर्वे के बाद अब संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र और जरूरी अनुमतियां लेने की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिकारियों के अनुसार सर्वे रिपोर्ट तैयार कर अक्तूबर में शासन को भेजी जाएगी। इसके बाद परियोजना की आगे की प्रक्रिया बढ़ेगी।

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Elevated Corridor 89 km survey completed two months report submitted government in October process underway
एलिवेटेड कॉरिडोर (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

करीब 25 हजार करोड़ रुपये की लागत वाले 89 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण की तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के दायरे में आने वाले सभी गांवों का सर्वे करीब दो महीने में पूरा कर लिया गया है। अब सर्वे से जुड़ी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद अक्तूबर में पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन की मंजूरी मिलते ही निर्माण की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।

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एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए गांवों में सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब परियोजना की अनुमति प्रक्रिया पर फोकस है। अधिकारियों के अनुसार सर्वे में परियोजना की जद में आने वाले क्षेत्रों, जमीन और प्रभावित परिसंपत्तियों से संबंधित जरूरी जानकारी जुटाई गई है।
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सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित विभागों को उनकी मंजूरी और अनापत्ति के लिए रिपोर्ट भेजी गई है। परियोजना से जुड़ी सभी विभागीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन स्तर पर प्रस्ताव का परीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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केंद्र सरकार ने जुलाई में कॉरिडोर के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इसका निर्माण एनएचएआई की ओर से हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर कराया जाना है। परियोजना में मुख्य एलिवेटेड मार्ग के अलावा फ्लाईओवर, लूप, रैंप और लिंक रोड भी शामिल हैं।

इससे पहले केंद्र सरकार के राजपत्र में परियोजना के एक हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़े 39 गांवों को चिह्नित किया गया था। निर्माण के लिए एनएचएआई की ओर से पैकेजवार निविदा प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है। ऐसे में अब सर्वे के बाद विभागीय अनुमतियों और शासन की स्वीकृति पर परियोजना की अगली गति निर्भर करेगी।

परियोजना से ये होंगे फायदे

  • शहर के भीतर वाहनों का दबाव घटेगा, खासकर प्रमुख संपर्क मार्गों पर।
  • लंबी दूरी का यातायात शहर के भीतरी हिस्सों से अलग करने में मदद मिलेगी।
  • वरुणा नदी के दोनों ओर के इलाकों को तेज और वैकल्पिक संपर्क मार्ग मिलेगा।
  • प्रमुख मार्गों, रिंग रोड और शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
  • फ्लाईओवर, रैंप और लिंक रोड के कारण जाम वाले हिस्सों पर यातायात का दबाव बांटा जा सकेगा।
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