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घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाएगा शिक्षा विभाग
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वाराणसी। कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। स्कूल बंद होने की वजह से बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में जिले के शिक्षा विभाग ने छात्रों के भविष्य के लिए अनोखी पहल की है। मेरा घर मेरा स्कूल के तहत शिक्षा विभाग ने घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत बच्चे अपने घर में बैठकर ही पढ़ाई कर सकते हैं।
मंथली एसेसमेंट टेस्ट के शुरू होने से पहले बच्चों के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई है। बच्चों को घर पर ही स्कूल जैसा माहौल उपलब्ध कराने के लिए टाइम टेबल भी तैयार किया गया है। बच्चों को पढ़ाने के लिए शुरू किए गए अभियान में शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के साथ गांव के उत्साही युवा वालंटियर के तौर पर इन बच्चों को पढ़ाएंगे। कक्षा 1-5 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले बाल पथिक कहलाएंगे वहीं 6-8 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले युवा पथिक होंगे। गांव के इन पथिकों को आई कार्ड के साथ उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए जिलाधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
रविवार को एसेसमेंट टेस्ट के पहले बीएसए ने इस अभियान की शुरुआत सेवापुरी ब्लाक के ग्राम सभा भटौली कंपोजिट विद्यालय देहली विनायक के बच्चों के साथ की। इस अभियान के जरिए शिक्षा विभाग के अधिकारी गांव गांव जाकर योजना को अमलीजामा पहनाने में लगे हैं। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों के बच्चों की सुविधा के लिए मेरा घर मेरा स्कूल अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत छात्र अपने घर में ही क्लास के लिए बैठ पाएंगे।
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मंथली एसेसमेंट टेस्ट के शुरू होने से पहले बच्चों के लिए इस अभियान की शुरुआत की गई है। बच्चों को घर पर ही स्कूल जैसा माहौल उपलब्ध कराने के लिए टाइम टेबल भी तैयार किया गया है। बच्चों को पढ़ाने के लिए शुरू किए गए अभियान में शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के साथ गांव के उत्साही युवा वालंटियर के तौर पर इन बच्चों को पढ़ाएंगे। कक्षा 1-5 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले बाल पथिक कहलाएंगे वहीं 6-8 तक के बच्चों को पढ़ाने वाले युवा पथिक होंगे। गांव के इन पथिकों को आई कार्ड के साथ उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए जिलाधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
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रविवार को एसेसमेंट टेस्ट के पहले बीएसए ने इस अभियान की शुरुआत सेवापुरी ब्लाक के ग्राम सभा भटौली कंपोजिट विद्यालय देहली विनायक के बच्चों के साथ की। इस अभियान के जरिए शिक्षा विभाग के अधिकारी गांव गांव जाकर योजना को अमलीजामा पहनाने में लगे हैं। बीएसए राकेश सिंह ने बताया कि सरकारी स्कूलों के बच्चों की सुविधा के लिए मेरा घर मेरा स्कूल अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत छात्र अपने घर में ही क्लास के लिए बैठ पाएंगे।
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