जख्म इतने मिले फिर सिले ही नहीं, दीप ऐसे बुझे की जले ही नहीं नहीं, व्यर्थ किस्मत पर रोने से क्या फायदा, समझ लेना कि हम तुम मिले ही नहीं। हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना, वो अपना काम करती है मैं अपना काम करता हूं। किसी के दिल की मायूसी जहां से होके गुजरी है।
कुमार विश्वास ने बीएचयू के मंच से राहुल गांधी के लिए क्यों कहा-इस अधूरी कहानी का क्या फायदा
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कुमार विश्वास ने अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया, अपना वाला बोलकर कटाक्ष किया। इससे पहले मंच पर मुख्य अतिथि डा. कुमार विश्वास ने महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर मार्ल्यापण और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।डा. विश्वास ने अपनी प्रसिद्ध कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, पर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है गाकर युवाओं को झुमने पर मजबूर कर दिया।
लोग कोई दीवाना कहता है पूरी कविता को बार-बार गुनगुनाने की फरमाईश करने लगे। इस बीच कुमार ने छात्रों की फरमाईश पर गया पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है, उस पगली लड़की के बिन मरना भी भारी लगता है। बताया कि पहली बार उन्होंने इक पगली लड़की के लिए बीएचयू आईआईटी में गाया था।
जिसके बाद इस कविता को प्रसिद्धी मिली। इस कविता पर युवाओं का जोश और बढ़ गया। दर्शक दीर्घा में रोशनी की कमी होने पर कटाक्ष किया कि देश की तरह आप भी अंधेरे में है। इसके बाद जख्म भर जाएंगे तो मिलो तो सही, मै भी सपने में आने लगूं। सिर्फ सांसो की गुफ्तगू है।
चांदनी नूर बरसा रही है। है नमन उनको जो देश को अमरत्व देकर गए से शहीदों को याद किया। लगभग दो घंटे के कार्यक्रम में डा. कुमार विश्वास ने युवाओं को इश्क की कविताओं से झुमाया तो देशभक्ति कविताओं से देशभक्ति का पाठ भी पढ़ाया।
मां विंध्यवासिनी को नमन और आचार्य शुक्ल को किया याद
कुमार विश्वास ने मिर्जापुर में पहली बार कविता पाठ करते हुए मां विंध्यवासिनी को नमन किया। कहा इस पर्वत से होकर हमारे आदर्श भगवान श्रीराम गुजरे हैं। ये आचार्य रामचंद्र शुक्ल की धरती है।
ठंड लगने पर शहीदों को किया याद
कविता पाठ करते समय कुमार विश्वास ने एक ऊनी टीशर्ट पहना था। ठंड लगने पर लोगों ने कुमार विश्वास को जैकेट पहनने को कहा तो उन्होंने कहा कि सियाचिन के बार्डर पर भी मिर्जापुर का कोई बेटा ड्यूटी दे रहा होगा। वो सैनिक कड़ी ठंड में सजग ड्यूटी कर रहा है तभी इस साउथ कैंपस में हम आसानी से कार्यक्रम कर रहे हैं। पुलिस के कार्य को भी सराहा। कहा कि पुलिस के लोग अपने परिवार के साथ त्योहार नहीं मना पाते और हम विरोध में उन पर पत्थर बरसाते हैं।
जब कुमार ने पूछा हाल, कहा-अउर कइसन बा
डा. कुमार विश्वास ने दक्षिणी परिसर में कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भोजपुरी में संवाद करते हुए कहा-अउर कइन बा। लोगों ने भी जवाब देते हुए कहा-की सब ठीक बा। मिर्जापुर में लोगों पर कालीन भैया का पानी चढ़ गया है।
कोई दीवाना कहता है गाकर आचार्य प्रभारी ने किया स्वागत
कार्यक्रम का शुभारंभ होने पर आचार्य प्रभारी प्रो. रमादेवी निम्मानापल्ली ने स्वागत उद्बोधन करते हुए कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है गाकर डा. कुमार विश्वास का स्वागत किया। अध्यक्षयीय उद्बोधन रेक्टर प्रो. वीके शुक्ला ने किया। मंच पर डा. आरएस मिश्रा, लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता मौजूद रहे। इस अवसर पर कौस्तुव चटर्जी, नवीन कुमार, कृष्णकांत आदि रहे।
महामना की बगिया साधना का केंद्र
डा. कुमार विश्वास ने कहाकि पहाड़ पर बसा महामना का यह कैंपस साधना का केंद्र है। 31 वर्ष से कविता पाठ कर रहा हूं। यहां पर पहली बार आया हूं। भविष्य में पता नहीं कब आऊंगा। इसलिए ध्यान से सुनें।
महाराष्ट्र चुनाव पर ली चुटकी
डा. कुमार विश्वास ने महाराष्ट्र चुुनाव के सियासी घटनाक्रम पर चुटकी ली। कहा कि अजित पवार ने जो किया, शरद पवार ने बताया दिया कि हर चाचा शिवपाल नहीं होता। इस पर लोगों ने तालियां बजाकर ठहाके लगाए।
नहीं आए रवि किशन
अंतर संकाय युवा महोत्सव दिशा में मुख्य अतिथि डा. कुमार विश्वास के साथ अभिनेता और सांसद गोरखपुर रवि किशन को भी आना था, पर दिल्ली चुनाव में व्यस्तता के चलते रवि किशन नहीं आए। शाम को डा. कुमार विश्वास ने अकेले समा बांधा।