बीएचयू के संगीत एवं मंच कला संकाय में चल रहे पूर्वांचार्य संगीत समारोह में शिक्षकों, कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देखने को मिल रही है। संकाय प्रमुख प्रो. राजेश शाह के निर्देशन में चल रहे पांच दिवसीय समारोह के तीसरे दिन गुरुवार को गायन, वादन, नृत्य के माध्यम से शिक्षक पूर्व आचार्यों को अपनी भावांजलि दी।
पंडित ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में प्रो. संगीता पंडित और प्रो. रेवती साकलकर ने प्रार्थना यज्जा कृतो दूरं मुदइति देवम की प्रस्तुति से कार्यक्रम की शुरूआत की। इसके बाद अनुराधा रतूड़ी ने पंडित रमाकांत गुंदेचा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।
उधर संकाय के शिक्षक डॉ. प्रेम किशोर मिश्र ने सितार वादन में राग परमेश्वरी में अलाप, जोड़ और गत की मनोहारी प्रस्तुति दी। तबले पर पंडित कुबेर नाथ मिश्र ने संगत की। श्यामा कुमारी ने गायन में राग मधुवंती की प्रस्तुति कर सभी की तालियां बटोरी। तबले पर पंकज राय और हारमोनियम पर विक्की कुमार ने संगत की।
अखियां मोरी देखन हरि को तरसे
इससे पहले बुधवार को ओंकारनाथ ठाकुर सभागार में पहली प्रस्तुति में डॉ. ज्ञानेश चंद्र पांडेय ने राग तोड़ी में विलंबित एकताल में ख्याल अखियां मोरी देखन हरि को तरसे को गाया। इसके बाद तीनताल में निबद्ध बीन अनाहत बाजे री और अंत में भजन सुन सुन साधो जी राजा राम कहो से प्रभु का गुणगान किया।
उनके साथ सारंगी पर अनीश मिश्र, हारमोनियम पर विक्की कुमार, तबले पर पं. कुबेर नाथ मिश्र के साथ ही गायन में अक्षत प्रताप सिंह और प्रियांशु घोष ने संगत की। इसके बाद सतीश कुमार सिंह ने बांसुरी वादन में राग शुद्ध सारंग में विलंबित एकताल में बंदिश तथा द्रुत तीनताल में बंदिश की प्रस्तुति दी।