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डिग्री के बाद डाक्टरों को सरकारी अस्पतालों में प्रैक्टिस अनिवार्य होगीः आशुतोष टंडन
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 01 Dec 2018 12:15 PM IST
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तकनीकी एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन
- फोटो : self
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उत्तर प्रदेश के तकनीकी एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि डॉक्टरों की कमी पूरा करने के लिए सरकारी कॉलेजों से मेडिकल की डिग्री लेने वाले छात्रों को कम से कम दो साल सरकारी अस्पतालों में सेवा देना अनिवार्य किया गया है। इसके लिए प्रवेश के दौरान ही उनसे बांड भरवाए जाएंगे।
तकनीकी सुविधा केंद्रों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं को और बेहतर किया जाएगा। साथ ही पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट होगा।
गुरुवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि पांच मेडिकल कॉलेज जुलाई अगस्त तक शुरू हो जाएंगे। इनमें बस्ती, बहराइच, फैजाबाद, फिरोजाबाद और सुल्तानपुर शामिल हैं।
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मिर्जापुर में ढाई साल में मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो गया है। छह से सात मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास दिसंबर में होगा। इनमें फतेहपुर, एटा, हरदोई, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर और प्रतापगढ़ जिले शामिल हैं।
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तकनीकी सुविधा केंद्रों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं को और बेहतर किया जाएगा। साथ ही पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट होगा।
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गुरुवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि पांच मेडिकल कॉलेज जुलाई अगस्त तक शुरू हो जाएंगे। इनमें बस्ती, बहराइच, फैजाबाद, फिरोजाबाद और सुल्तानपुर शामिल हैं।
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मिर्जापुर में ढाई साल में मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो गया है। छह से सात मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास दिसंबर में होगा। इनमें फतेहपुर, एटा, हरदोई, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर और प्रतापगढ़ जिले शामिल हैं।
आठ से दस साल बाद स्थिति बेहतर होगी
देश में 100 मेडिकल कॉलेज शुरू होने में दो से तीन साल लग सकते हैं। पांच साल बाद ये बेहतर ढंग से काम करेंगे। तकरीबन आठ से दस साल बाद स्थिति बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि लखनऊ के पीजीआई में बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है।
अभी 985 बेड हैं। 700 बेड और बढ़ाए जा रहे हैं। सेवानिवृत्त मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों को रोकने के लिए सवा तीन लाख रुपये महीना देने को तैयार हैं, लेकिन डाक्टर निजी संस्थानों में चले जाते हैं।
अभी 985 बेड हैं। 700 बेड और बढ़ाए जा रहे हैं। सेवानिवृत्त मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों को रोकने के लिए सवा तीन लाख रुपये महीना देने को तैयार हैं, लेकिन डाक्टर निजी संस्थानों में चले जाते हैं।