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प्रदोष व्यापिनी धनतेरस आज, पूजे जाएंगे लक्ष्मी गणेश
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धनतेरस की तिथि और मुहूर्त को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है। काशी के विद्वानों के अनुसार प्रदोष व्यापिनी धनतेरस का ही महत्व होता है। ऐसी स्थिति में 12 नवंबर का मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ है। वहीं शाम को मुहूर्त मिलने के कारण वैष्णव संप्रदाय के लोग 13 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाएंगे।
काशी विद्वत परिषद के मंत्री पं. दीपक मालवीय ने बताया कि धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार धनतेरस और दीपावली का पर्व मनाने में प्रदोषकाल की ही महत्ता है। सूर्यास्त के बाद दो या तीन घड़ी अर्थात 48 या 72 मिनट का समय प्रदोषकाल माना जाता है। 12 नवंबर को शाम 6:01 बजे से त्रयोदशी लग रही है जो 13 नवंबर को शाम 4:11 बजे तक रहेगी। भविष्योतर पुराण के अनुसार प्रदोषकाल में धनत्रयोदशी का पर्व मनाने की प्रधानता है। 12 नवंबर की शाम को त्रयोदशी प्राप्त होने से धनतेरस मनाया जाएगा। वहीं चौखंभा स्थित गोपाल मंदिर की ओर से जारी सूचना के अनुसार वैष्णव संप्रदाय 13 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाएगा।
दूर होता है अकाल मृत्यु का भय
ज्योतिषाचार्य विमल जैन का कहना है कि धनतेरस से पांच दिन तक शाम को प्रदोषकाल में घर के प्रवेश द्वार के बाहर एक पात्र में अन्न रखकर उसके ऊपर दीप दान करने से यमराज भी प्रसन्न होते हैं। प्रदोषकाल में घर के प्रवेश द्वार के बाद दक्षिणाभिमुख दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
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अभ्यंग स्नान से मिलेगा आरोग्य सुख
विमल जैन ने बताया कि धनतेरस से भैयादूज तक अभ्यंग स्नान से आरोग्य सुख मिलता है। सूर्योदय के पूर्व उठें, शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने से आरोग्य सुख मिलेगा। तेल के अलावा दूध, दही, देशी घी, तिल, आंवला आदि से स्नान करने पर कष्टों का निवारण होता है। नरक चतुर्दशी पर 13 नवंबर को 14 दीप प्रज्जवलित करके देवस्थान, बाग-बगीचे, और स्वच्छ स्थानों पर रखने का विधान है।
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काशी विद्वत परिषद के मंत्री पं. दीपक मालवीय ने बताया कि धर्म शास्त्रीय मान्यता के अनुसार धनतेरस और दीपावली का पर्व मनाने में प्रदोषकाल की ही महत्ता है। सूर्यास्त के बाद दो या तीन घड़ी अर्थात 48 या 72 मिनट का समय प्रदोषकाल माना जाता है। 12 नवंबर को शाम 6:01 बजे से त्रयोदशी लग रही है जो 13 नवंबर को शाम 4:11 बजे तक रहेगी। भविष्योतर पुराण के अनुसार प्रदोषकाल में धनत्रयोदशी का पर्व मनाने की प्रधानता है। 12 नवंबर की शाम को त्रयोदशी प्राप्त होने से धनतेरस मनाया जाएगा। वहीं चौखंभा स्थित गोपाल मंदिर की ओर से जारी सूचना के अनुसार वैष्णव संप्रदाय 13 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाएगा।
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दूर होता है अकाल मृत्यु का भय
ज्योतिषाचार्य विमल जैन का कहना है कि धनतेरस से पांच दिन तक शाम को प्रदोषकाल में घर के प्रवेश द्वार के बाहर एक पात्र में अन्न रखकर उसके ऊपर दीप दान करने से यमराज भी प्रसन्न होते हैं। प्रदोषकाल में घर के प्रवेश द्वार के बाद दक्षिणाभिमुख दीपक जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
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अभ्यंग स्नान से मिलेगा आरोग्य सुख
विमल जैन ने बताया कि धनतेरस से भैयादूज तक अभ्यंग स्नान से आरोग्य सुख मिलता है। सूर्योदय के पूर्व उठें, शरीर पर तेल लगाकर स्नान करने से आरोग्य सुख मिलेगा। तेल के अलावा दूध, दही, देशी घी, तिल, आंवला आदि से स्नान करने पर कष्टों का निवारण होता है। नरक चतुर्दशी पर 13 नवंबर को 14 दीप प्रज्जवलित करके देवस्थान, बाग-बगीचे, और स्वच्छ स्थानों पर रखने का विधान है।