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धनतेरस: काशी में 18 अक्तूबर से खुल जाएंगे स्वर्णमयी अन्नपूर्णेश्वरी के कपाट, पांच दिनों तक होंगे दर्शन

Sun, 05 Oct 2025 12:22 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 05 Oct 2025 12:22 PM IST
सार

Dhanteras 2025: काशी में मां अन्नपूर्णा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में भक्त आते हैं। पांच दिन तक होने वाले इस आयोजन में मां का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

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Dhanteras doors of golden Annapurneshwari temple will open in Kashi from 18 October darshan
मां अन्नपूर्णा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Varanasi News: धनतेरस पर काशीपुराधीश्वरी मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन होंगे। इस बार भी श्रद्धालुओं को पांच दिनों तक माता के स्वर्णमयी विग्रह के दर्शन मिलेंगे। 18 अक्तूबर को कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे और 22 अक्तूबर को शयन आरती के बाद अगले साल के लिए बंद हो जाएंगे। 

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बाबा विश्वनाथ को अन्न-धन की भिक्षा देने वाली मां अन्नपूर्णेश्वरी भक्तों पर भी खजाना लुटाएंगे। धनतेरस पर 18 अक्तूबर को मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होंगे और भक्तों को माता का खजाना मिलेगा। 18 अक्तूबर को माता के भक्तों की वर्ष भर की प्रतीक्षा खत्म हो जाएगी। मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने बताया कि माता अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप का दर्शन आम श्रद्धालुओं के लिए धनरतेरस से लेकर अन्नकूट तक के लिए ही खुलता है। 
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इस बीच धनतेरस पर ही प्रसाद स्वरूप सिक्के और लावा का वितरण किया जाता है। मान्यता है कि प्रसाद में मिले सिक्के और लावा को तिजोरी व भंडार में रखने से कभी अन्न-धन की कमी नहीं रहती। इस साल भी पांच दिन (18 से 22 अक्तूबर) स्वर्णमयी अन्नपूर्णा जी का दर्शन श्रद्धालु कर सकेंगे। 

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20 अक्तूबर को पूरे देश में मनाई जाएगी दीपावली
दीपावली पर तिथि भ्रम को श्री काशी विद्वत परिषद ने दूर किया है। ऑनलाइन बैठक के बाद निर्णय लिया गया कि दीपावली का महापर्व 20 अक्तूबर को ही मनाया जाएगा। शनिवार को श्री काशी विद्वत परिषद के धर्मशास्त्र एवं ज्योतिष प्रकोष्ठ की ऑनलाइन बैठक परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. रामचंद्र पांडेय की अध्यक्षता में हुई। पूर्ण प्रदोष काल व्यापिनी तिथि 20 अक्तूबर को हो रही है।

21 अक्तूबर को तीन प्रहर से अधिक अमावस्या और साढ़े तीन प्रहर से अधिक वृद्धि गामिनी प्रतिपदा के होते हुए भी व्रत के पारण का काल प्राप्त नहीं हो रहा है जो कि दीपावली प्रयुक्त लक्ष्मी पूजन का एक आवश्यक अंग है। 

इसलिए विभिन्न धर्म शास्त्रीय सिद्धांतों का अनुशीलन करते हुए सर्वसम्मति से 20 अक्तूबर को ही पूरे देश में दीपावली पर्व मनाने का निर्णय दिया गया। जिन पंचांगों में कुछ तथाकथित पंचांगकारों ने 21 नवंबर को दीपावली लिखा है। बैठक में प्रो. विनय कुमार पांडेय भी रहे। 

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