भक्ति: दुबई समेत कई देशों के भक्त हैं राम नाम के कर्जदार, मुस्लिम भी बड़ी संख्या में शामिल; मानते हैं नियम
काशी के रामरमापति बैंक के नियम को विदेशों के रामभक्त भी मानते हैं। मुस्लिम भक्तों ने भी यहां से कर्ज ले रखा है। ये लोग यहां के नियमों का पालन करते हैं। यहां पर कर्जदारों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
Ram Ramapati Bank: कलियुग केवल नाम अधारा। राम से बड़ा राम का नाम त्रेता के साथ ही कलियुग में भी सच है। यही कारण है कि काशी समेत आठ देशों के भक्त रामनाम के कर्जदार हैं। राम नाम की महिमा का ही प्रताप है कि काशी के रामरमापति बैंक से मुस्लिम श्रद्धालुओं ने भी रामनाम का कर्ज ले रखा है।
रामनवमी से शुरू हुए दस दिवसीय अनुष्ठान के तहत रामनाम का कर्ज देने की शुरुआत हो चुकी है। रामरमापति बैंक में इस बार कनाडा, वेनेजुएला, आस्ट्रेलिया, अमेरिका, इटली, नेपाल, मलयेशिया और इंडोनेशिया के भक्तों ने कर्ज लिया है।
इनमें अमेरिका के वेनेजुएला और कैलिफोर्निया के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे ज्यादा है। साथ ही नोएडा की मुस्लिम महिला और दुबई के कई मुसलमानों ने भी रामनाम का ये कर्ज लिया है। अब तक 19 अरब 49 करोड़ 59 लाख 25 हजार का रामनाम का धन इस बैंक में जमा हो चुका है।
चेतगंज के सुनील कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने पहली बार 2005 में रामनाम का कर्ज लिया था। मन्नत पूरी होने के बाद 2009 में फिर से कर्ज लिया। इसके बाद रामनवमी पर फिर ये कर्ज लिया है। आठ महीने 10 दिनों की अवधि ने तो पूरा जीवन ही बदल दिया।
लोहटिया की कंचन गुप्ता ने बताया कि 2022 में उन्होंने राम नाम का कर्ज लिया था। रामलला के पास जो भी श्रद्धा भाव और पूर्ण विश्वास के साथ जाता है, प्रभु उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। रामरमापति बैंक के प्रबंधक सुमित मेहरोत्रा ने बताया कि श्री रामनाम का कर्ज उन्हीं भक्तों को दिया जाता है जो दुखी, अभिमान रहित और संशय रहित होकर बैंक में श्री रामलला की शरण में आते हैं। कर्जदारों की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
एक बार में मिलता है सवा लाख रामनाम का कर्ज
रामरमापति बैंक से हर श्रद्धालु को एक बार में सवा लाख का ही कर्ज मिलता है। मुहूर्त देखकर ही रामनाम लिखने की प्रक्रिया शुरू हाेती है। देश के बाहर के श्रद्धालुओं को सामग्री डाक से भेजी जाती है। लेकिन, नाम जाप लेने वाले को हर हाल में स्वयं आना पड़ता है। आने से पूर्व बैंक से दिन और मुहूर्त पूछना पड़ता है।
कर्ज मिलने के बाद रोजाना 500 रामनाम लिखकर इसे आठ महीने 10 दिन में पूरा करना होता है। देवमंदिर या भगवान राम के चित्र के सामने पूरी प्रक्रिया संपन्न होती है। रामनाम लिखने का सामान बैंक की मुहर लगा हुआ कागज, कलम, दवात और लाल स्याही निशुल्क बैंक से दी जाती है।
नियम से रोजाना ब्रह्म मुहूर्त में लेखन, जाप और पाठ होता है। अशौच या अशुद्ध अवस्था के दौरान लिखना मना होता है। आठ महीने 10 दिन के दौरान मांसाहार, प्याज, लहसुन, सूतक और जूठे भोजन से बचना होता है। साथ ही अहिंसा व्रत का पालन करना होता है।
एक साथ ही जमा होता है बैंक में कर्ज
श्री रामनाम लिखे हुए कागजों को एक नवीन वस्त्र में लपेटकर अपने ही पास रखना होता है। पूजन के समय एक साथ बैंक में कर्ज जमा होता है। बैंक का सामान घटने पर परदेसी भक्त अपने पास से सामान मंगाकर लिख सकते हैं। इसके समाप्त होने के बाद पूजन के समय इसकी कीमत बैंक अदा करेगा।
विदेशी भक्त डाक से मनीऑर्डर के जरिये अपना कर्ज मंगा सकते हैं। समय सीमा पूरी होने के बाद 40 दिन के अंदर श्रद्धालुओं को बैंक में पहुंचकर पूजन करने के बाद 11 दंडी साधुओं को भोज कराना होता है।