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ठगी के लिए बनाया नकली ‘राइस पुलर’
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sun, 15 Mar 2015 01:52 AM IST
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दुर्लभ वस्तुओं की तस्करी करने वालों ने नकली ‘राइस पुलर’ के जरिए एक झटके में करोड़ों कमाने का ख्वाब संजोया था लेकिन उनकी योजना धरी रह गई। खरीदार ने परखने के बाद बेलनाकार वस्तु के राइस पुलर होने की बात खारिज कर दी तो तस्कर इसे चोलापुर के मरूई गांव के खेत में छोड़कर चले गए।
बम जैसी दिखने वाली इस वस्तु ने इलाके में कई दिनों तक दहशत फैला दी थी। शनिवार को एसपी क्राइम राहुल राज ने पुलिस लाइन में दो तस्करों को मीडिया के सामने पेश कर इस रहस्यमय कहानी का पर्दाफाश कर दिया।
मरूई गांव के खेत में 25 फरवरी को एक लावारिस बैग मिला था, जिस पर एंटी रेडिएशन पैक लिखा था।
इस वजह से इसे रेडियो एक्टिव तत्व या बम माना जाने लगा था और इलाके में सनसनी फैल गई थी। सारी रात गांव वाले सो नहीं पाए। बीएचयू, आईबी, एटीएस, एटामिक एनर्जी विभाग नई दिल्ली एवं भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) मुंबई के वैज्ञानिक दो दिनों तक माथापच्ची के बाद भी इस बेलनाकार वस्तु के बारे में सटीक पता नहीं लगा पाए।
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आखिरकार इसे बार्क भेज दिया गया। दूसरी ओर पुलिस की क्राइम ब्रांच भी मामले का पता लगाने में जुटी थी। हफ्ते भर की तफ्तीश के बाद पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी और संदिग्धों से पूछताछ में कहानी खुलकर सामने आ गई।
दरअसल मरूई के भैयालाल पटेल, टिसौरा के शंकर और छतांव के संतोष राजभर कथित ‘राइस पुलर’ को रामरती पटेल के ट्यूबवेल में छुपा रखा था। रामरती ने जब सवाल उठाया तो भैयालाल ने उसे खेत में फेंक दिया। इसके बाद दोनों फरार हो गए। रामरती से इसकी सूचना मिलने पर संतोष को पकड़ा।
उसने पूछताछ में बताया कि जौनपुर के जफराबाद इलाके के हिसामपुर का रहने वाला विनोद बरनवाल इस घटना का मास्टर माइंड है। उसी ने इस वस्तु को अपने घर में तैयार किया और राइस पुलर बताकर बेचने की योजना बनाई थी। पुलिस ने जब विनोद को गिरफ्तार किया तो उसने बताया कि राइस पुलर एंटीक माना जाता है और उसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है।
उड़ीसा के एक तस्कर के जरिए उसने एंटीक तस्कर रवि को माल खरीदने के लिए चोलापुर बुलाया था उससे उसने इसके लिए तीन हजार करोेड़ रुपये की मांग की थी। रवि ने जांच में माल को नकली घोषित कर दिया और उसे फेंक कर चला गया। पकड़े जाने के डर से उन्होंने इसको खेत में फेंक दिया। मामले का खुलासा करने वाली टीम में क्राइम ब्रांच ने प्रभारी अभिसूचना एसपी सिंह, सुनील कुमार वर्मा, अतुल नारायण सिंह, कमलेश राय, एसओ चोलापुर पवन कुमार उपाध्याय आदि शामिल रहे।
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बम जैसी दिखने वाली इस वस्तु ने इलाके में कई दिनों तक दहशत फैला दी थी। शनिवार को एसपी क्राइम राहुल राज ने पुलिस लाइन में दो तस्करों को मीडिया के सामने पेश कर इस रहस्यमय कहानी का पर्दाफाश कर दिया।
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मरूई गांव के खेत में 25 फरवरी को एक लावारिस बैग मिला था, जिस पर एंटी रेडिएशन पैक लिखा था।
इस वजह से इसे रेडियो एक्टिव तत्व या बम माना जाने लगा था और इलाके में सनसनी फैल गई थी। सारी रात गांव वाले सो नहीं पाए। बीएचयू, आईबी, एटीएस, एटामिक एनर्जी विभाग नई दिल्ली एवं भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) मुंबई के वैज्ञानिक दो दिनों तक माथापच्ची के बाद भी इस बेलनाकार वस्तु के बारे में सटीक पता नहीं लगा पाए।
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आखिरकार इसे बार्क भेज दिया गया। दूसरी ओर पुलिस की क्राइम ब्रांच भी मामले का पता लगाने में जुटी थी। हफ्ते भर की तफ्तीश के बाद पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी और संदिग्धों से पूछताछ में कहानी खुलकर सामने आ गई।
दरअसल मरूई के भैयालाल पटेल, टिसौरा के शंकर और छतांव के संतोष राजभर कथित ‘राइस पुलर’ को रामरती पटेल के ट्यूबवेल में छुपा रखा था। रामरती ने जब सवाल उठाया तो भैयालाल ने उसे खेत में फेंक दिया। इसके बाद दोनों फरार हो गए। रामरती से इसकी सूचना मिलने पर संतोष को पकड़ा।
उसने पूछताछ में बताया कि जौनपुर के जफराबाद इलाके के हिसामपुर का रहने वाला विनोद बरनवाल इस घटना का मास्टर माइंड है। उसी ने इस वस्तु को अपने घर में तैयार किया और राइस पुलर बताकर बेचने की योजना बनाई थी। पुलिस ने जब विनोद को गिरफ्तार किया तो उसने बताया कि राइस पुलर एंटीक माना जाता है और उसकी मुंहमांगी कीमत मिलती है।
उड़ीसा के एक तस्कर के जरिए उसने एंटीक तस्कर रवि को माल खरीदने के लिए चोलापुर बुलाया था उससे उसने इसके लिए तीन हजार करोेड़ रुपये की मांग की थी। रवि ने जांच में माल को नकली घोषित कर दिया और उसे फेंक कर चला गया। पकड़े जाने के डर से उन्होंने इसको खेत में फेंक दिया। मामले का खुलासा करने वाली टीम में क्राइम ब्रांच ने प्रभारी अभिसूचना एसपी सिंह, सुनील कुमार वर्मा, अतुल नारायण सिंह, कमलेश राय, एसओ चोलापुर पवन कुमार उपाध्याय आदि शामिल रहे।