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Varanasi News: 24 घंटे बाद भी नहीं हटा कर्नाटक गेस्ट हाउस का मलबा

Mon, 23 Sep 2024 04:50 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 04:50 AM IST
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Debris of Karnataka Guest House not removed even after 24 hours
चाय विक्रेता की हालत गंभीर, घायल दोनों साधुओं को अस्पताल से छुट्टी मिली
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माई सिटी रिपोर्टर


वाराणसी। हरिश्चंद्र घाट के बगल में स्थित कर्नाटक स्टेट गेस्ट हाउस के पूर्वी और उत्तरी छोर की गिरी दीवार का मलबा 24 घंटे बाद रविवार को भी नहीं उठाया गया। इसके साथ ही कटान रोकने के लिए जहां दीवार गिरी थी वहां बोल्डर भी नहीं डाला गया। इसके चलते गेस्ट हाउस के मैनेजर और कर्मचारी आशंकित हैं कि कहीं भवन का अन्य हिस्सा भी न गिर जाए।

उधर, कर्नाटक सरकार की ओर से गेस्ट हाउस की व्यवस्था के लिए नियुक्त किए गए जनरल मैनेजर कृष्णा न्यायमूर्ति बंगलूरू से विमान लेट होने के कारण रविवार की देर शाम तक नहीं पहुंच पाए। कर्नाटक स्टेट गेस्ट हाउस के सहायक मैनेजर अरुण कुमार ने बताया कि जनरल मैनेजर के स्थल निरीक्षण किए बगैर कोई काम शुरू नहीं किया जाएगा। गंगा में लटक रहे लोहे के एंगल को भी उनके आने के बाद ही काट कर हटाया जाएगा।
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हरिश्चंद्र घाट के बगल में स्थित कर्नाटक स्टेट गेस्ट हाउस के पूर्वी और उत्तरी हिस्से की दीवार शनिवार की दोपहर अचानक तेज आवाज के साथ गिर गई थी। दीवार के मलबे की चपेट में आकर चाय विक्रेता कल्लू साहनी और जूना अखाड़ा के साधु श्याम गिरी व वैशाख गिरी घायल हो गए थे। तीनों को उपचार के लिए बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया था। कल्लू की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है, जबकि दोनों साधुओं को शनिवार की देर रात छुट्टी दे दी गई थी। दीवार गिरने की सूचना पाकर पहुंचे कैंट के भाजपा विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने अपर जिला अधिकारी शहर को बिल्डिंग के अन्य हिस्से में कटान रोकने के लिए बोल्डर डलवाने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी रविवार की देर शाम तक बोल्डर नहीं डलवाया जा सका।
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सुंदरीकरण के काम से पहले अच्छे से चबूतरा बनवाना चाहिए था

गेस्ट हाउस में मैनेजर सहित चार कर्मचारी रहते हैं। वॉचमैन सत्यनारायण निषाद अपने परिवार के साथ रहते हैं। गेस्ट हाउस के बगल में रहने वाले काशी और केदार मिश्रा को अब पूरा भवन गिरने का डर सताने लगा है। उन लोगों ने कहा कि हरिश्चंद्र घाट पर सुंदरीकरण का काम कराने वाले लोगों को पहले अच्छे तरीके से गेस्ट हाउस के पूर्वी छोर से लेकर उत्तरी हिस्से तक 5-6 फीट ऊंचा चबूतरा बनवाना चाहिए था। इसके बाद निर्माण कार्य कराते तो कोई क्षति नहीं होती।
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