{"_id":"580bceb24f1c1b722b705170","slug":"cyber-attacks-on-the-websites-of-banks-worrying","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैंकों की वेबसाइट्स पर साइबर हमला चिंताजनक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैंकों की वेबसाइट्स पर साइबर हमला चिंताजनक
ब्यूरो, अमर उजाला/वाराणसी
Updated Sun, 23 Oct 2016 02:10 AM IST
विज्ञापन
भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बैंकों की वेबसाइट्स पर साइबर हमला चिंता की बात है लेकिन हमारी सुरक्षा प्रणाली इससे निबटने में सक्षम है। हम जल्द ही इस संकट से बाहर निकल आएंगे। शनिवार को भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर आर. गांधी ने 32 लाख एटीएम में सेंधमारी किए जाने पर चिंता जताई। बीएचयू के विधि संकाय में ‘भारत में भुगतान प्रणाली का विकास एवं क्रांति’ विषय पर व्याख्यान देते हुए उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्राहकों की सुरक्षा के लिए हमने जो कदम उठाए हैं वे किसी भी विकसित देश में अपनाई जा रही व्यवस्था से कमतर नहीं हैं।
श्री गांधी ने मुद्राओं और भुगतान के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि ये व्यवस्था अनाज या अन्य वस्तुओं के लेन-देन (बार्टर) से शुरू हुई। स्वर्ण मुद्रा का भी दौर आया और आज हम पेपरलेस भुगतान के दौर में हैं। कहा कि सबसे लंबा सफर चेक पेमेंट का रहा। चार साल से हम ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम चला रहे हैं। कागज से पहले कंप्यूटर और आज मोबाइल तक पहुंच गए हैं। ऑनलाइन पेमेंट के दौर में हैकिंग की समस्या है लेकिन इससे भी निबटने के लिए हमने ऑनलाइन अलर्ट जैसे एसएमएस, ओटीपी, पासकोड, पिन की सुनिश्चितता की व्यवस्था की है।
वित्तीय साक्षरता से भी ऐसी समस्याओं को दूर करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने उनसे सवाल-जवाब भी किए। विशिष्ट अतिथि आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक अजय कुमार रहे। स्वागत प्रबंध शास्त्र संस्थान के निदेशक प्रो. राजकुमार ने किया। विषय स्थापना अर्थशास्त्र विभाग के हेड प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय ने की। संचालन डॉ. साक्षी श्रीवास्तव व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सीपी मल्ल ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
श्री गांधी ने मुद्राओं और भुगतान के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि ये व्यवस्था अनाज या अन्य वस्तुओं के लेन-देन (बार्टर) से शुरू हुई। स्वर्ण मुद्रा का भी दौर आया और आज हम पेपरलेस भुगतान के दौर में हैं। कहा कि सबसे लंबा सफर चेक पेमेंट का रहा। चार साल से हम ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम चला रहे हैं। कागज से पहले कंप्यूटर और आज मोबाइल तक पहुंच गए हैं। ऑनलाइन पेमेंट के दौर में हैकिंग की समस्या है लेकिन इससे भी निबटने के लिए हमने ऑनलाइन अलर्ट जैसे एसएमएस, ओटीपी, पासकोड, पिन की सुनिश्चितता की व्यवस्था की है।
विज्ञापन
वित्तीय साक्षरता से भी ऐसी समस्याओं को दूर करने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थाओं का सहयोग लिया जा रहा है। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने उनसे सवाल-जवाब भी किए। विशिष्ट अतिथि आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक अजय कुमार रहे। स्वागत प्रबंध शास्त्र संस्थान के निदेशक प्रो. राजकुमार ने किया। विषय स्थापना अर्थशास्त्र विभाग के हेड प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय ने की। संचालन डॉ. साक्षी श्रीवास्तव व धन्यवाद ज्ञापन प्रो. सीपी मल्ल ने किया।
विज्ञापन