{"_id":"693b2deb4aaf58281a0161e9","slug":"cultural-heritage-of-kashi-and-tamil-nadu-comes-alive-at-namo-ghat-varanasi-news-c-20-vns1056-1217382-2025-12-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Varanasi News: नमो घाट पर जीवंत हुई काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Varanasi News: नमो घाट पर जीवंत हुई काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत
विज्ञापन
नमो घाट पर काशी तमिल संगमम में लोक नृत्य की प्रस्तुति देतीं उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक केंद्र
काशी तमिल संगमम के तहत आयोजित सांस्कृतिक संध्या में कला व संगीत की अलौकिक छटा देखने को मिली। कलाकारों की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नमो घाट पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्शकों की उपस्थिति में काशी व तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत एक ही मंच पर सजीव हो उठी।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ अंशुमान महाराज के सरोद वादन से हुआ। उनके साथ तबले पर उदय शंकर मिश्रा तथा बांसुरी पर अभिषेक सिंह की संगत ने वातावरण को सुरमयी बना दिया। दूसरी प्रस्तुति में बनारस घराने के पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने अपनी गायकी से दर्शकों को विभोर कर दिया। उन्होंने दीवाना किए श्याम कैसा जादू डाला रे... और आया करे जरा कह दो सांवरिया... जैसे मधुर भजनों ने श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया।
तीसरी प्रस्तुति तमिलनाडु के श्री एस. गौतम के पारंपरिक थापट्टन लोक वादन की थी। दक्षिण भारतीय लोक-संगीत की अनूठी लय और ऊर्जा को दर्शकों ने मंच पर महसूस किया। चौथी प्रस्तुति रूपा सिंह के कथक नृत्य की रही। कलाकार समृद्धि तिवारी, दीपशिखा जैसवार, आयुषी, हिमांशी रस्तोगी और वैष्णवी गुप्ता ने अपनी सुंदर भाव-भंगिमाओं और ताल-लयों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतिम प्रस्तुति तमिलनाडु के शिव कुमार की जिकट्टम लोक नृत्य और वादन रही। संचालन ललिता शर्मा ने किया। काशी और तमिल संस्कृति के इस संगम ने दर्शकों पर अविस्मरणीय छाप छोड़ी।
विज्ञापन
विज्ञापन
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम का शुभारंभ अंशुमान महाराज के सरोद वादन से हुआ। उनके साथ तबले पर उदय शंकर मिश्रा तथा बांसुरी पर अभिषेक सिंह की संगत ने वातावरण को सुरमयी बना दिया। दूसरी प्रस्तुति में बनारस घराने के पं. गणेश प्रसाद मिश्र ने अपनी गायकी से दर्शकों को विभोर कर दिया। उन्होंने दीवाना किए श्याम कैसा जादू डाला रे... और आया करे जरा कह दो सांवरिया... जैसे मधुर भजनों ने श्रोताओं को भक्ति रस में डुबो दिया।
विज्ञापन
तीसरी प्रस्तुति तमिलनाडु के श्री एस. गौतम के पारंपरिक थापट्टन लोक वादन की थी। दक्षिण भारतीय लोक-संगीत की अनूठी लय और ऊर्जा को दर्शकों ने मंच पर महसूस किया। चौथी प्रस्तुति रूपा सिंह के कथक नृत्य की रही। कलाकार समृद्धि तिवारी, दीपशिखा जैसवार, आयुषी, हिमांशी रस्तोगी और वैष्णवी गुप्ता ने अपनी सुंदर भाव-भंगिमाओं और ताल-लयों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अंतिम प्रस्तुति तमिलनाडु के शिव कुमार की जिकट्टम लोक नृत्य और वादन रही। संचालन ललिता शर्मा ने किया। काशी और तमिल संस्कृति के इस संगम ने दर्शकों पर अविस्मरणीय छाप छोड़ी।

नमो घाट पर काशी तमिल संगमम में लोक नृत्य की प्रस्तुति देतीं उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक केंद्र
विज्ञापन