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सिगरा थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करें एसएसपी
टीम डिजिटल / अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 08 Dec 2016 07:18 PM IST
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अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्दश महेंद्र श्रीवास्तव की कोर्ट ने सिगरा थाने के एक मामले में गवाहों के हाजिर नहीं होने पर सिगरा थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को आदेश दिया है। साथ ही, गवाहों को उपस्थिति सुनिश्चित कराने को कहा है और सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया। सुनवाई की अगली तारीख तीन जनवरी नियत की गई है।
अदालत ने कहा कि सरकार बनाम संतोष गुप्ता के मामले में सिगरा थानाध्यक्ष गवाहों को प्रस्तुत करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। आरोप बनने के बाद 15 बार गवाही हेतु तारीख नियत की गई पर किसी गवाह को पेश नहीं किया जा सका और न ही आख्या कोर्ट में दी गई।
अन्य लंबित वादों में भी यही स्थिति है, छह माह से एक भी गवाह नहीं पेश किया गया। इससे प्रतीत होता है कि सत्र वादों की पैरवी में लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में गवाही समाप्त कर आरोपियों के बरी होने पर इसका दायित्व सिगरा थानाध्यक्ष और एसएसपी का होगा। एसएसपी गवाहों की उपस्थिति हर हालत में सुनिश्चित कराएं।
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उधर, इसी अदालत ने सरकार बनाम अजित वर्मा से संबंधित हत्या के मामले में बेहद लापरवाहीपूर्ण ढंग से वाद की पैरवी पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए प्रभारी निरीक्षक कैंट को 19 दिसंबर को तलब करते हुए कहा है कि यह स्पष्ट करें कि क्यों न अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एसएसपी को संदर्भित कर दिया जाए।
अदालत ने कहा कि सरकार बनाम संतोष गुप्ता के मामले में सिगरा थानाध्यक्ष गवाहों को प्रस्तुत करने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। आरोप बनने के बाद 15 बार गवाही हेतु तारीख नियत की गई पर किसी गवाह को पेश नहीं किया जा सका और न ही आख्या कोर्ट में दी गई।
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अन्य लंबित वादों में भी यही स्थिति है, छह माह से एक भी गवाह नहीं पेश किया गया। इससे प्रतीत होता है कि सत्र वादों की पैरवी में लापरवाही बरती जा रही है। ऐसे में गवाही समाप्त कर आरोपियों के बरी होने पर इसका दायित्व सिगरा थानाध्यक्ष और एसएसपी का होगा। एसएसपी गवाहों की उपस्थिति हर हालत में सुनिश्चित कराएं।
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उधर, इसी अदालत ने सरकार बनाम अजित वर्मा से संबंधित हत्या के मामले में बेहद लापरवाहीपूर्ण ढंग से वाद की पैरवी पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताते हुए प्रभारी निरीक्षक कैंट को 19 दिसंबर को तलब करते हुए कहा है कि यह स्पष्ट करें कि क्यों न अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एसएसपी को संदर्भित कर दिया जाए।