मिर्जापुर में बोलीं सुभाषिनी अली सहगल : दलितों गरीबों पर अत्याचार नहीं होगा बर्दाश्त
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सोनभद्र के उभ्भा गांव में हुए नरसंहार को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से हक हकूक की आवाज उठाने का सिलसिला जारी है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की मुख्य वक्ता वृंदा करात व सुभाषिनी अली ने मंगलवार को मिर्जापुर जिले के मड़िहान में जनसभा को संबोधित किया।
सुभाषिनी अली ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से उभ्भा गांव में नरसंहार हुआ। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ग्राम समाज की जमीन गरीब व भूमिहीनों को दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि दलितों गरीबों के ऊपर हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री को संबोधित 11 ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
मड़िहान तहसील में आयोजित सभा में वृंदा करात ने मांग की कि ग्रामसभा की जमीनों पर मठ, आश्रम व समितियों द्वारा फर्जी ढंग से कब्जा का टीम गठित कर जांच कराई जाय। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए भूमिहीनों में अविलंब इसे वितरित किया जाय। कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि जिस तरह सोनभद्र के उभ्भा गांव में गरीबों के हक पर डाका डालने के बाद नरसंहार किया गया, वह अधिकारियों के मामलों को नजर अंदाज करने का परिणाम है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मिर्जापुर सोनभद्र जनपद में आदिवासियों, वनवासियों व भूमिहीनों को भूमाफियाओं द्वारा उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। अधिकारी भूमाफियों से कदमताल कर रहे हैं। इसी करिश्मा का परिणाम रहा कि उभ्भा गांव में दस निर्दोषों को गोलियों से छलनी किया गया। गरीबों को न्याय मिलता तो बबुरा रघुनाथ सिंह में हिम्मत कोल की हत्या न होती।
मांग की गई कि मृतक परिवार के लोगों को 25- 25 लाख रुपये का मुआवजा सरकार द्वारा दिया जाय। उनके परिवार की सुरक्षा व बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्च के साथ परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी दिया जाने की मांग की गई। कहा कि मड़िहान तहसील क्षेत्र के कलवारी, बेदौली, गोपलपुर, अमोई, कोटवा पाण्डेय, बभनी थपनवा समेत दर्जनों गांवों में हजारों एकड़ जमीन भूमाफियाओं के कब्जे है।
भूमि को दबंगों से मुक्त कराकर भूमिहीन गरीब व दलितों को जीवन यापन के लिए दिया जाय। उभ्भा जैसी घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए शासन प्रशासन को चेतना होगा। कार्यक्रम के समापन के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी मड़िहान विमल कुमार दुबे को सौंपा। मांग किया कि वनाधिकार कानून का सही क्रियान्वयन नहीं हुआ तो आंदोलन होगा। इस दौरान हीरालाल यादव, अरुण प्रताप सिंह, नंदलाल आर्य आदि कार्यकर्ता उपस्थित रहे।