दारोगा दुर्गविजय सिंह के बेटे ने कहा- कातिल के खात्मे से मिलेगा दिल को कुछ सुकून
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पापा की मौत का जख्म तो ताउम्र नहीं भरेगा, लेकिन कातिल का खात्मा होने से दिल को कुछ सुकून मिला है। दूसरे के जीवन से खेलने वालों को पुलिस की तरफ से ऐसे ही जवाब दिया जाना चाहिए। बदमाशों की गोली से जान गंवाने वाले दरोगा दुर्गविजय सिंह के पुत्र पवन कुमार सिंह उर्फ डिंपल का ऐसा कहना है।
गौरतलब है कि दो जुलाई को अपराधी रोहित को पेशी पर ले जाने के दौरान मुजफ्फरनगर के सलारपुर मोड़ के पास बदमाशों ने दरोगा दुर्गविजय को गोली मार दी थी। इसके बाद रोहित को छुड़ा ले गए थे। दरोगा की उपचार के दौरान दिल्ली के एम्स में मौत हो गई थी।
डिंपल ने कहा कि पापा की हत्या से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ऊपर वाले से प्रार्थना कर रहे थे कि पापा के कातिलों को जल्द सजा मिले। बताया कि मेरे चाचा शेषनाथ सिंह को मंगलवार की सुबह करीब पांच बजे मुजफ्फरनगर के जानसठ कोतवाली के क्षेत्राधिकारी ने सूचना दी कि दरोगा
दुर्गविजय सिंह को गोली मारकर पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाए गए बदमाश रोहित सांडू को पुलिस ने उसके एक साथी के साथ ढेर कर दिया। बेटे ने कहा कि इस खबर सुकून मिला कि पापा के कातिल को पुलिस ने उसी की भाषा में जवाब देते हुए मौत की नींद सुला दिया।
खुशी है कि पापा के त्रयोदशाह से पहले ही पुलिस ने यह काम कर दिया। अपराधियों के साथ पुलिस को ऐसे ही पेश आना चाहिए। पवन ने कहा कि पापा की हत्या में शामिल अन्य बदमाशों को भी ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए।
दरोगा दुर्गविजय के भाई शेषनाथ सिंह रामनगर में पीएसी की 36वीं बटालियन में हेड कांस्टेबल हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने बदमाशों को मुठभेड़ में मारकर मेरे परिवार के लोगों के दर्द को कुछ कम किया है। दरोगा दुर्गविजय सिंह मऊ के दतौली गांव के मूल निवासी थे। वह नगर के तड़बनवा में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते थे।
मन में दुख, सीएम ने नहीं व्यक्त की शोक संवेदना :
पवन कुमार सिंह, शेषनाथ सिंह, दरोगा की पत्नी इंदू सिंह ने कहा कि हम लोगों के मन में इस बात का दुख है कि इस घटना के लिए मुख्यमंत्री ने शोक संवेदना तक व्यक्त नहीं की। यही नहीं, कोई जनप्रतिनिधि भी संवेदना व्यक्त करने नहीं आया।