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डायन बताकर महिला और उसकी तीन मासूम बच्चियों पर फेंका था तेजाब, चार आरोपियों को सात साल की कैद
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 30 Mar 2017 03:44 PM IST
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कपसेठी क्षेत्र की वर्ष 2009 की घटना, भूतप्रेत के चक्कर में बढ़ गया था मामला
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भूत करवाने का आरोप लगाकर महिला और उसकी तीन मासूम बच्चियों पर तेजाब फेंकने के चार आरोपियों को अदालत ने सात साल कैद की सजा सुनाई है। आरोपी महफूज, जाबिर, आशिक अली और नूर आलम को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीपक यादव की कोर्ट ने दोषी पाया।
बुधवार को तीनों को सात वर्ष की कड़ी कैद और छह हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के मुताबिक कपसेठी थाने के तिलवार निवासी गुलाम गौस 21 मार्च, 2009 की रात में घर में सोया था। रात करीब साढ़े 11 बजे गांव के ही चारों अभियुक्त आए और दरवाजा खुलवाया। वादी ने आने का कारण पूछा तो अभियुक्तों ने डायन बताकर भूत कराने का आरोप लगाया।
वादी ने इंकार किया तो अभियुक्तों ने तेजाब फेंक दिया। इससे वादी की पत्नी शाहजहां और तीन मासूम बच्चियां अंजुम, परवीन और शाहीन झुलस गईं। प्रकरण में नौ गवाह पेश किए गए।
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कोर्ट ने फैसले में कहा कि जिन पीड़ितों को तेजाब फेंककर झुलसाया गया, सभी नारी हैं, जिनमें अबोध भी हैं। अभियुक्तों ने वारदात के बाद जान से मारने की धमकी भी दी। यह जघन्य अपराध है।
अभियोजन अधिकारी घनश्याम राय की दलील रही कि मात्र भूत करने जैसी अंधविश्वास की बातों का आरोप लगाकर तेजाब फेंका गया और इसके चलते मासूमों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी। छोटी सी उम्र की अंजुम का जीवन ही बरबाद हो गया। लंबे समय तक इलाज कराया, उसमें लाखों रुपये लगा।
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बुधवार को तीनों को सात वर्ष की कड़ी कैद और छह हजार जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के मुताबिक कपसेठी थाने के तिलवार निवासी गुलाम गौस 21 मार्च, 2009 की रात में घर में सोया था। रात करीब साढ़े 11 बजे गांव के ही चारों अभियुक्त आए और दरवाजा खुलवाया। वादी ने आने का कारण पूछा तो अभियुक्तों ने डायन बताकर भूत कराने का आरोप लगाया।
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वादी ने इंकार किया तो अभियुक्तों ने तेजाब फेंक दिया। इससे वादी की पत्नी शाहजहां और तीन मासूम बच्चियां अंजुम, परवीन और शाहीन झुलस गईं। प्रकरण में नौ गवाह पेश किए गए।
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कोर्ट ने फैसले में कहा कि जिन पीड़ितों को तेजाब फेंककर झुलसाया गया, सभी नारी हैं, जिनमें अबोध भी हैं। अभियुक्तों ने वारदात के बाद जान से मारने की धमकी भी दी। यह जघन्य अपराध है।
अभियोजन अधिकारी घनश्याम राय की दलील रही कि मात्र भूत करने जैसी अंधविश्वास की बातों का आरोप लगाकर तेजाब फेंका गया और इसके चलते मासूमों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी। छोटी सी उम्र की अंजुम का जीवन ही बरबाद हो गया। लंबे समय तक इलाज कराया, उसमें लाखों रुपये लगा।