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बनारस में कर्मचारी नेता को बदमाशों ने गोलियों से भूना, आधी रात में फायरिंग से दहला इलाका
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 24 Jan 2018 10:50 AM IST
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मृतक मुकेश व उसकी पत्नी
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वाराणसी के डीरेका परिसर में कंदवा गेट के पास कर्मचारी नेता ताराधीश मुकेश (43) मंगलवार रात करीब दस बजे बदमाशों ने घर के सामने गोली मारकर हत्या कर दी। मुकेश बिहार के मुंगेर के रहने वाले थे। हत्या का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो सका है।
पुलिस के अनुसार वारदात में 32 बोर की पिस्टल का उपयोग किया गया है। मंगलवार की रात दस बजे मुकेश कार से कंदवा गेट के पास स्थित अपने घर पहुंचे थे। इसी दौरान दो बाइक पर सवार आधा दर्जन बदमाशों ने आधा दर्जन राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
गोलियों की आवाज सुनकर मुकेश की पत्नी प्रियंका दौड़कर बाहर आई और मदद के लिए चिल्लाने लगी। पड़ोसी बाहर आ गए और एक युवक की मदद से गंभीर हालत में मुकेश को डीरेका अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान मुकेश को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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पुलिस के अनुसार वारदात में 32 बोर की पिस्टल का उपयोग किया गया है। मंगलवार की रात दस बजे मुकेश कार से कंदवा गेट के पास स्थित अपने घर पहुंचे थे। इसी दौरान दो बाइक पर सवार आधा दर्जन बदमाशों ने आधा दर्जन राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
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गोलियों की आवाज सुनकर मुकेश की पत्नी प्रियंका दौड़कर बाहर आई और मदद के लिए चिल्लाने लगी। पड़ोसी बाहर आ गए और एक युवक की मदद से गंभीर हालत में मुकेश को डीरेका अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान मुकेश को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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घटना स्थल पर पहुंचे आईजी दीपक रतन
- फोटो : अमर उजाला
सूचना पाकर पर आईजी रेंज दीपक रतन, एससपी रामकृष्ण भारद्वाज और एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने बताया कि वारदात की तहकीकात के लिए डीरेका परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज आरपीएफ की मदद से खंगाली जा रही है।
डीरेका में 2009 में तीन दिन तक हड़ताल करने पर सात लोग रिमूव हुए थे। मुकेश भी इनमें शामिल थे। इस मामले में सजा के तौर पर सात साल तक डीरेका प्रशासन ने प्रमोशन पर रोक लगा दी थी। दो महीने पहले ही मुकेश को बहाल कर उनका प्रमोशन किया गया था।
मुकेश के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। दोनों बच्चे नंदिनी और अभिनव लगातार रोते हुए सबसे पूंछ रहे हैं कि पापा कहां हैं, पापा को क्या हुआ है लेकिन किसी के पास इसका जबाव नहीं है।
डीरेका में 2009 में तीन दिन तक हड़ताल करने पर सात लोग रिमूव हुए थे। मुकेश भी इनमें शामिल थे। इस मामले में सजा के तौर पर सात साल तक डीरेका प्रशासन ने प्रमोशन पर रोक लगा दी थी। दो महीने पहले ही मुकेश को बहाल कर उनका प्रमोशन किया गया था।
मुकेश के परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। दोनों बच्चे नंदिनी और अभिनव लगातार रोते हुए सबसे पूंछ रहे हैं कि पापा कहां हैं, पापा को क्या हुआ है लेकिन किसी के पास इसका जबाव नहीं है।