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वाराणसी के चर्चित विशाल अपहरण कांड की 12 साल बाद सीबीआई जांच
अजय सिंह आलोक,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 21 Feb 2017 05:46 PM IST
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हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई जांच, लोहता थाने पहुंची दो सदस्यीय टीम, कब्जे में लिए अहम रिकॉर्ड
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12 साल पहले हुए जिस विशाल अपहरण कांड में सीबीसीआईडी, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी, उसकी फाइलें अब फिर खुल गई हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर अब सीबीआई ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र के भट्ठी गांव के कुंवर विशाल का अब तक पता नहीं चल पाया है जबकि पूर्व की तफ्तीशों में आरोपियों का नारको टेस्ट तक कराया गया था। तीन दिन पहले लोहता थाने पहुंची सीबीआई की दो सदस्यीय टीम ने घटना की तहकीकात के साथ ही उससे जुड़े अहम रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं।
आरटीओ के पूर्व लिपिक मधुबन प्रसाद शास्त्री का पुत्र विशाल 01 सितंबर 2005 को दोपहर करीब दो बजे भट्ठी स्थित अपने घर से कुछ सामान लेने लोहता बाजार गया था। उसके बाद से अब तक विशाल का कहीं कुछ पता नहीं चल पाया है। पिता मधुबन प्रसाद की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज होने के बाद घटना की जांच सबसे पहले एसटीएफ और फिर क्राइम ब्रांच ने की।
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जब विशाल का पता नहीं चला तो फाइनल रिपोर्ट लगा दी। उसके बाद शासन के आदेश पर 2006 में मामले की सीबीसीआईडी जांच शुरू हुई। जनवरी 2007 में सीबीसीआईडी ने भी फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मधुबन प्रसाद ने जिनको आरोपित किया था, उनका नारको टेस्ट तक कराया गया लेकिन विशाल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
घटना की सीबीआई जांच के लिए शासन में गुहार अनसुनी होने पर मधुबन प्रसाद ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
सीबीआई की दो सदस्यीय टीम के लोहता थाने पहुंचने और घटना से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने की पुष्टि थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने भी की। जब घटना हुई, उस वक्त विशाल की उम्र 17 वर्ष थी और वह काशी विद्यापीठ से स्नातक की पढ़ाई कर रहा था।
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वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र के भट्ठी गांव के कुंवर विशाल का अब तक पता नहीं चल पाया है जबकि पूर्व की तफ्तीशों में आरोपियों का नारको टेस्ट तक कराया गया था। तीन दिन पहले लोहता थाने पहुंची सीबीआई की दो सदस्यीय टीम ने घटना की तहकीकात के साथ ही उससे जुड़े अहम रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं।
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आरटीओ के पूर्व लिपिक मधुबन प्रसाद शास्त्री का पुत्र विशाल 01 सितंबर 2005 को दोपहर करीब दो बजे भट्ठी स्थित अपने घर से कुछ सामान लेने लोहता बाजार गया था। उसके बाद से अब तक विशाल का कहीं कुछ पता नहीं चल पाया है। पिता मधुबन प्रसाद की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज होने के बाद घटना की जांच सबसे पहले एसटीएफ और फिर क्राइम ब्रांच ने की।
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जब विशाल का पता नहीं चला तो फाइनल रिपोर्ट लगा दी। उसके बाद शासन के आदेश पर 2006 में मामले की सीबीसीआईडी जांच शुरू हुई। जनवरी 2007 में सीबीसीआईडी ने भी फाइनल रिपोर्ट लगा दी। मधुबन प्रसाद ने जिनको आरोपित किया था, उनका नारको टेस्ट तक कराया गया लेकिन विशाल के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।
घटना की सीबीआई जांच के लिए शासन में गुहार अनसुनी होने पर मधुबन प्रसाद ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने घटना की सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
सीबीआई की दो सदस्यीय टीम के लोहता थाने पहुंचने और घटना से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेने की पुष्टि थानाध्यक्ष राजीव सिंह ने भी की। जब घटना हुई, उस वक्त विशाल की उम्र 17 वर्ष थी और वह काशी विद्यापीठ से स्नातक की पढ़ाई कर रहा था।