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अखिलेश गौतम हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा, भाई ने ही की थी हत्या
ब्यूरो,अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Sun, 29 Oct 2017 11:14 PM IST
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आरोपी अरविंद गौतम
- फोटो : अमर उजाला
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आजमगढ़ के बरदह थाना क्षेत्र के नर्वे गांव में गत 27 अक्तूबर शुक्रवार को गोली मारकर की गई स्कूल संचालक और बसपा नेता के पुत्र अखिलेश गौतम की हत्या उसके बड़े भाई अरविंद गौतम ने ही की थी। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर अरविंद ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।
पुलिस के अनुसार अरविंद ने बताया कि अखिलेश अपनी प्रेमिका से शादी करके उसको साथ रखना चाहता था। जबकि परिवार के लोग पक्ष में नहीं थे। इसलिए अखिलेश की हत्या की। अरविंद की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रिवाल्वर और खोखा शौचालय की टंकी तोड़कर बरामद किया।
घटना के तीसरे दिन रविवार को एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने हत्या का खुलासा कर दिया। एसपी सिटी के मुताबिक नर्वे गांव निवासी बलिहारी गौतम दिल्ली के नागिन बिहार नजफगढ़ में रहते थे। वह दिल्ली में बसपा के कैडर नेता थे। वहीं पर घर के पास इनका एक अंबेडकर इंटर कालेज चलता है।
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बलिहारी के दो बेटे और एक बेटी है। बलिहारी के दो बेटों में बड़ा अरविंद और छोटा अखिलेश था। शहर के एक प्राइवेट विद्यालय में पढ़ते समय अखिलेश का दूसरे बिरादरी की लड़की से प्रेम प्रसंग था। वर्ष 2015 में इन दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। 26 अक्तूबर की रात अखिलेश और अरविंद में पुन: विवाद हुआ।
इसके बाद अरविंद ने योजनाबद्ध तरीके से 27 अक्तूबर की सुबह साढ़े सात बजे दोनों बाडीगार्ड और चालक को ठेकमा बाजार से नाश्ता लाने भेज दिया। जबकि आंगन के चारपाई पर बैठे अखिलेश को ताबड़तोड़ चार गोलियां मारकर हत्या कर दी।
एसपी सिटी ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर एसओ बरदह सुरेश चंद्र पहुंच गए। इनके पहुंचने के काफी देर बाद सीओ लालगंज और मैं पहुंचा। रास्ते में एसओ से बात होने पर उन्होने जो घटनाक्रम बताया। उससे शक अरविंद पर शक हुआ।
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पुलिस के अनुसार अरविंद ने बताया कि अखिलेश अपनी प्रेमिका से शादी करके उसको साथ रखना चाहता था। जबकि परिवार के लोग पक्ष में नहीं थे। इसलिए अखिलेश की हत्या की। अरविंद की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त रिवाल्वर और खोखा शौचालय की टंकी तोड़कर बरामद किया।
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घटना के तीसरे दिन रविवार को एसपी सिटी सुभाष चंद्र गंगवार ने हत्या का खुलासा कर दिया। एसपी सिटी के मुताबिक नर्वे गांव निवासी बलिहारी गौतम दिल्ली के नागिन बिहार नजफगढ़ में रहते थे। वह दिल्ली में बसपा के कैडर नेता थे। वहीं पर घर के पास इनका एक अंबेडकर इंटर कालेज चलता है।
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बलिहारी के दो बेटे और एक बेटी है। बलिहारी के दो बेटों में बड़ा अरविंद और छोटा अखिलेश था। शहर के एक प्राइवेट विद्यालय में पढ़ते समय अखिलेश का दूसरे बिरादरी की लड़की से प्रेम प्रसंग था। वर्ष 2015 में इन दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली। 26 अक्तूबर की रात अखिलेश और अरविंद में पुन: विवाद हुआ।
इसके बाद अरविंद ने योजनाबद्ध तरीके से 27 अक्तूबर की सुबह साढ़े सात बजे दोनों बाडीगार्ड और चालक को ठेकमा बाजार से नाश्ता लाने भेज दिया। जबकि आंगन के चारपाई पर बैठे अखिलेश को ताबड़तोड़ चार गोलियां मारकर हत्या कर दी।
एसपी सिटी ने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर एसओ बरदह सुरेश चंद्र पहुंच गए। इनके पहुंचने के काफी देर बाद सीओ लालगंज और मैं पहुंचा। रास्ते में एसओ से बात होने पर उन्होने जो घटनाक्रम बताया। उससे शक अरविंद पर शक हुआ।
अरविंद ने हत्या से पहले किया था रिहर्सल
डेमो
- फोटो : डेमो पिक
अरविंद गौतम अपने छोटे भाई अखिलेश गौतम की हत्या करने की योजना तैयार की थी। उस एक तीर से वह कई निशाना लगाना चाहता था। भाई को गोली मारने से पहले वह कई बार फायर करने का रिहर्सल भी किया था।
अरविंद के पिता स्व. बलिहारी राम बसपा के पुराने नेता रह चुके थे। ऐसे में पार्टी के नेता और पदाधिकारियों ने उसे बचाने का भी प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। 28 अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने अखिलेश के गहरी साजिश का शिकार होना प्रकाशित किया था।
पुलिस को भी इसके जरिए आधार मिला। अखिलेश ने वर्ष 2015 में कोर्ट मैरेज किया था। हालांकि उसके इस शादी से मां और बड़ा भाई अरविंद आदि खुश नहीं थे। परिवार के अन्य सदस्यों की मंशा भांपकर अरविंद ने छोटे भाई अखिलेश के मारने की योजना बनाई।
पुलिस के मुताबिक अरविंद के भाई की मौत के बाद वह अपने पिता के पूरे संपत्ति का मालिक बन जाता। पुलिस को गुमराह कर अपने गांव के दुश्मनों को फंसाने और लोगों में सहानुभूति बटोरने का प्लान तैयार किया था।
योजना के तहत ही अरविंद घटना से दो दिन पहले से ही अपने छत पर जाकर लाइसेंसी असलहे से फायर करता था। ताकि घर से गोली की आवाज आने पर जल्द गांव के लोग वहां पहुंच न सके। इसके लिए वह रिहर्सल किया।
अरविंद के पिता स्व. बलिहारी राम बसपा के पुराने नेता रह चुके थे। ऐसे में पार्टी के नेता और पदाधिकारियों ने उसे बचाने का भी प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने ध्यान नहीं दिया। 28 अक्तूबर के अंक में अमर उजाला ने अखिलेश के गहरी साजिश का शिकार होना प्रकाशित किया था।
पुलिस को भी इसके जरिए आधार मिला। अखिलेश ने वर्ष 2015 में कोर्ट मैरेज किया था। हालांकि उसके इस शादी से मां और बड़ा भाई अरविंद आदि खुश नहीं थे। परिवार के अन्य सदस्यों की मंशा भांपकर अरविंद ने छोटे भाई अखिलेश के मारने की योजना बनाई।
पुलिस के मुताबिक अरविंद के भाई की मौत के बाद वह अपने पिता के पूरे संपत्ति का मालिक बन जाता। पुलिस को गुमराह कर अपने गांव के दुश्मनों को फंसाने और लोगों में सहानुभूति बटोरने का प्लान तैयार किया था।
योजना के तहत ही अरविंद घटना से दो दिन पहले से ही अपने छत पर जाकर लाइसेंसी असलहे से फायर करता था। ताकि घर से गोली की आवाज आने पर जल्द गांव के लोग वहां पहुंच न सके। इसके लिए वह रिहर्सल किया।