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दहेज हत्या में पति, सास, ससुर और ननद को 10 वर्ष की जेल
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी/भदोही
Updated Wed, 25 Jan 2017 10:18 PM IST
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पिता की तहरीर पर दर्ज हुआ था ससुराल वालों पर केस
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दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बुधवार को पति समेत चार लोगों को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने पति के अलावा सास, ससुर और ननद को दोषी मिलने पर सजा दी। भदोही जिले में दुर्गागंज थानाक्षेत्र के शेरपुर गांव निवासी मनोरमा देवी की 22 सितंबर 2014 को मौत हो गई थी।
मृतका के पिता ने दहेज के लिए ससुराल के लोगों पर पुत्री को मार डालने का आरोप लगाया था।
दुर्गागंज पुलिस को दी गई तहरीर में उन्होंने बताया था कि अपनी बेटी का विवाह 28 जून 2011 को अनिल सिंह निवासी शेरपुर के साथ किया था। परिवार में पति अनिल, ससुर हूबलाल, सास इंद्रावती देवी और ननद सुनीता दहेज में एक लाख रुपये और बाइक मांग रहे थे।
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जब मांग पूरी नही की तब पुत्री की हत्या कर दी गई। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया।
गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश अंगद प्रसाद ने आरोपी हूबलाल, इंद्रावती, अनिल और सुनीता को दहेज हत्या का दोषी पाया।
दहेज हत्या की विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में दस-दस वर्ष सश्रम कारावास का फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष से बहस पैरवी अपर शासकीय अधिवक्ता हसन रजा अंसारी ने की।
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अदालत ने पति के अलावा सास, ससुर और ननद को दोषी मिलने पर सजा दी। भदोही जिले में दुर्गागंज थानाक्षेत्र के शेरपुर गांव निवासी मनोरमा देवी की 22 सितंबर 2014 को मौत हो गई थी।
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मृतका के पिता ने दहेज के लिए ससुराल के लोगों पर पुत्री को मार डालने का आरोप लगाया था।
दुर्गागंज पुलिस को दी गई तहरीर में उन्होंने बताया था कि अपनी बेटी का विवाह 28 जून 2011 को अनिल सिंह निवासी शेरपुर के साथ किया था। परिवार में पति अनिल, ससुर हूबलाल, सास इंद्रावती देवी और ननद सुनीता दहेज में एक लाख रुपये और बाइक मांग रहे थे।
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जब मांग पूरी नही की तब पुत्री की हत्या कर दी गई। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया।
गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायाधीश अंगद प्रसाद ने आरोपी हूबलाल, इंद्रावती, अनिल और सुनीता को दहेज हत्या का दोषी पाया।
दहेज हत्या की विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में दस-दस वर्ष सश्रम कारावास का फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष से बहस पैरवी अपर शासकीय अधिवक्ता हसन रजा अंसारी ने की।