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वाराणसी: कोरोना का आंध्रा स्ट्रेन कम प्रभावी, बदली म्यूटेंट की संरचना
Fri, 07 May 2021 08:42 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Fri, 07 May 2021 08:42 PM IST
सार
बीएचयू विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर के अध्ययन में सामने आया परिणाम
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- फोटो : social media
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विस्तार
वाराणसी में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक नए वेरिएंट को लेकर तरह.तरह की चर्चा हो रही है। इस बीच बीएचयू विज्ञान संस्थान में सेंटर फॉर जेनेटिक डिसऑर्डर के प्रोफेसर परिमल दास के निर्देशन में हुए अध्ययन में यह परिणाम सामने आया है कि आंध्रा स्ट्रेन का प्रभाव कम है। यही नही म्यूटेंट की संरचना भी बदल गई है। इस अध्ययन से कोरोना के नए स्ट्रेन को लेकर चिंतित लोगों के लिए राहत मिली है।
प्रो. परिमल दास के साथ अध्ययन में शोध छात्र प्रशांत रंजन भी है। प्रोण्दास ने बताया कि बायोइन्फरमेटिक्स के अध्ययन से यह पता चला है कि आंध्रा कोविड-19 का प्रभाव अन्य भारतीय उपभेदों बी 1-617 और बी 1-618 की तुलना में कम वायरल है। कोविड 19 का एन 440 के वेरिएंट, जिसे आंध्र प्रदेश स्ट्रेन भी कहा जाता है। विशेषज्ञों ने पहले बताया था कि यह पहले वाले की तुलना में कम से कम 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगा।
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प्रो. परिमल दास के साथ अध्ययन में शोध छात्र प्रशांत रंजन भी है। प्रोण्दास ने बताया कि बायोइन्फरमेटिक्स के अध्ययन से यह पता चला है कि आंध्रा कोविड-19 का प्रभाव अन्य भारतीय उपभेदों बी 1-617 और बी 1-618 की तुलना में कम वायरल है। कोविड 19 का एन 440 के वेरिएंट, जिसे आंध्र प्रदेश स्ट्रेन भी कहा जाता है। विशेषज्ञों ने पहले बताया था कि यह पहले वाले की तुलना में कम से कम 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगा।
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बी1-617 और बी3-618 के भारतीय वेरिएंट से भी ज्यादा मजबूत हो सकता है। बताया कि स्पाइक प्रोटीन के आरबीडी क्षेत्र के आसपास कोई संरचनात्मक परिवर्तन नहीं होता है जो एसीई- 2 के रिसेप्टर और एंटीबॉडी के साथ इंटरेक्शन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एसीई-2 रिसेप्टर सॉर्स कोव-2 की मदद से मानव में संक्रमण फैलाता है। यदि आरबीडी संरचना बाधित हो जाती है, तो एंटीबॉडी भी ठीक ढंग से स्पाइक प्रोटीन के आरबीडी से इंटरैक्ट नहीं कर पाता। यह अंतत: वर्तमान में उपलब्ध टीकों की प्रभावकारिता को भी बाधित करता है और मानव में पुन: संक्रमण के बढ़े हुए कारण का कारण बनता है।
आंध्रा स्टे्रन से ज्यादा खतरनाक है डबल और ट्रिपल म्यूटेंट
प्रो. परिमल दास ने बताया कि हमारे अध्ययनों से यह भी पता चला है कि आरबीडी क्षेत्र में एपी स्ट्रेन की तुलना में डबल और ट्रिपल म्यूटेंट की संरचना बदली हुई है। इस वजह से डबल म्यूटेंट और ट्रिपल म्यूटेंट एपी स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक हैं । भारत की वर्तमान स्थिति ने पहले से ही इन विषाणुजनित उपभेदों बी1-617 और बी1-618 के साथ पुन: संक्रमण में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।
आंध्रा स्टे्रन से ज्यादा खतरनाक है डबल और ट्रिपल म्यूटेंट
प्रो. परिमल दास ने बताया कि हमारे अध्ययनों से यह भी पता चला है कि आरबीडी क्षेत्र में एपी स्ट्रेन की तुलना में डबल और ट्रिपल म्यूटेंट की संरचना बदली हुई है। इस वजह से डबल म्यूटेंट और ट्रिपल म्यूटेंट एपी स्ट्रेन से ज्यादा खतरनाक हैं । भारत की वर्तमान स्थिति ने पहले से ही इन विषाणुजनित उपभेदों बी1-617 और बी1-618 के साथ पुन: संक्रमण में तेजी से बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है।