बलिदान दिवस: बलिया में अमर सपूतों को श्रद्धांजलि देकर किया बड़ा एलान, मुख्य सचिव को सौंपी जिम्मेदारी
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बलिया दौरे पर हैं। बलिया में सीएम योगी ने हुंकार भरते हुए कहा- बलिया को तीन साल पहले ही मेडिकल कॉलेज मिल जाना चाहिए था। मैं मुख्य सचिव को साथ लेकर आया हूं जो शाम तक यहां रहेंगे और क्रांंतिकारियों की स्मृति में मेडिकल कॉलेज देकर जाएंगे।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा कि बलिया को तीन साल पहले ही मेडिकल कॉलेज मिल जाना चाहिए था। कहा कि इसीलिए वह मुख्य सचिव को लेकर आए हैं, वह शाम तक यहां रहेंगे और क्रांतिकारियों की स्मृति में मेडिकल कालेज देकर जाएंगे। सीएम पुलिस लाइन परेड ग्राउंड में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले बलिदान दिवस पर सीएम ने आजादी की लड़ाई में बलिदान देने वाले अमर सपूतों को श्रद्धांजलि दी। जिला जेल में अमर शहीद राजकुमार बाघ की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
सीएम ने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से कहा कि यहां एयरपोर्ट जैसा रोडवेज स्टेशन बनाइए और कुछ इलेक्ट्रिक बसें भी चलवाइए। शिक्षकों से अपील की यहां की गांव-गांव की क्रांति को पुस्तक का रूप दें। हम उसे प्रकाशित कराएंगे। बलिया के विकास के लिए दयाशंकर सिंह और मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को जिम्मेदारी सौंपी।
इससे पहले सीएम ने कार्यक्रम का शुभारंभ स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम नायक मंगल पांडेय और महान सेनानी चित्तू पांडेय के चित्र के सामने दीप जलाकर किया। भारत माता की जय व वंदेमातरम से अपने संबोधन की शुरुआत करने वाले मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में जब पूरा देश जुटा है, मुझे बलिया के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े ऐतिहासिक बलिदान दिवस पर आने का अवसर मिला है। बलिया का अपना इतिहास है।
बलिया पौराणिक स्थल का प्रतीक
कहा जाता है बलिया के लिए अनुशासन का कोई महत्व नहीं होता, लेकिन आजादी के बाद देश के विकास के लिए जिस अनुशासन की आवश्यकता थी, वह बलिया ने दिखाया। बलिया के क्रांतिकारियों के बलिदान ने जनपद को नई पहचान दी। बलिया पौराणिक स्थल का प्रतीक है। यहां एक तरफ मां गंगा तो दूसरी तरफ मां सरयू का पवित्र संगम है। अंग्रेजों ने भारतीयों पर क्रूरता की। उन्हें बैरकपुर की छावनी में मारकर जलाने का काम बलिया के लाल मंगल पांडेय ने किया।
गांधी जी ने भारत छोड़ो आंदोलन का एलान किया तो चित्तू पांडेय के नेतृत्व में यहां का तूफान आगे बढ़ा। आजादी के अमृत महोत्सव जैसे कार्यक्रम हमें प्रेरणा प्रदान करते हैं। 1942 में तो बलिया ने अपने आप को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया था। 50 हजार लोगों ने जेल पर धावा बोलकर चित्तू पांडेय आदि को आजाद करा लिया था।
चित्तू पांडेय कलेक्टर और महानंद मिश्र पुलिस कप्तान बन गए थे। यहां के लोगों ने हल, कुदाल, फावड़े आदि से ही लड़ाई लड़ी थी। यहां के लोगों का त्याग बलिया को नई पहचान देता है। इमरजेंसी के दिनों में भी बलिया ने अग्रणी भूमिका निभाई। एक आम आदमी के मौलिक अधिकारों, उसकी सुरक्षा और स्वावलंबन के लिए जयप्रकाश के नेतृत्व में आंदोलन चला। इसमें स्व. चंद्रशेखर का योगदान अविस्मरणीय रहा।रने के लिए सराहना की।
मंत्री दयाशंकर का दिखा कद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह बलिया के हैं, इसलिए बलिया परिवहन के क्षेत्र में और अच्छा होना चाहिए। बलिया से लखनऊ की दूरी लगातार कम करते रहें। इसके लिए पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से बलिया को जोडे़ंगे, ताकि दो से ढाई घंटे में लखनऊ की दूरी तय कर लें। यहां का बस स्टेशन अच्छा हो। कहा कि यहां पर एयरपोर्ट जैसा बस स्टेशन बनाएं।
कुछ इलेक्ट्रिक बसें भी नगर में चलवाएं। बलिया नगर का दायरा बढ़ाएं। बलिया के विकास के लिए सभी जनप्रतिनिधि आगे बढ़कर काम करें। कहा कि मूलभूत सुविधाओं को और मजबूत करना है। उन्हें कहा चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र से कहा कि जिला कारागार को शहर से बाहर स्थानांतरित कराएं। जिला कारागार को भव्य स्मारक का रूप दिया जाए।
पांच संकल्पों से आगे बढ़ेगा देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त के दिन देश के नागरिकों को पांच संकल्प दिलाए हैं। इसके अनुसार हर व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ेगा तो भारत दुनिया की महाशक्ति बनेगा। आज प्रदेश में बिना भेदभाव के सबको योजनाओं का लाभ मिल रहा है। हर गरीब को आवास, शौचालय, राशन और अन्य लाभकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। आने वाले समय में भारत दुनिया का नेतृत्व करने वाला होगा।
सेनानियों व आश्रितों को किया सम्मानित
सीएम योगी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व उनके आश्रितों को स्मृति चिह्न व अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इन महान सेनानियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। कहा कि सौभाग्य है कि आजादी के योद्धाओं के दर्शन हो रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का स्वतंत्रता संग्राम बलिया नामक पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने इस पुस्तक के लेखक डॉ. शिवकुमार कौशिकेय को इस महान व ऐतिहासिक क्षण का इस पुस्तक के माध्यम से सजीव वर्णन करने के लिए सराहना की।