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भोग-प्रसाद का विवाद पहुंचा सीएम तक

Sun, 27 Mar 2016 02:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी Updated Sun, 27 Mar 2016 02:00 AM IST
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CM-offerings to deliver indulgence controversy
काशी विश्वनाथ मंदिर
बाबा विश्वनाथ के भंडार में भोग-प्रसाद को लेकर मची खींचतान की शिकायत शनिवार को मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गई। महाशिवरात्रि पर मंगला आरती दर्शन में हुई किचकिच से शुरू हुआ विवाद अब बाबा के भोग-प्रसाद की व्यवस्था को लेकर सतह पर आ गया है। न्यास परिषद के सदस्य प्रदीप बजाज ने भंडार की व्यवस्था में एक दानदाता के एकाधिकार को लेकर उंगली उठाई है।
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प्रदीप का आरोप है कि मंदिर के अधिकारियों, कर्मचारियों की शह पर दानदाता अजय शर्मा मनमानी कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उधर, अजय ने इसे न्यास सदस्य की सोची समझी चाल बताया है। उनका कहना है कि वह अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए बाबा के भोग की व्यवस्था पर निशाना साध रहे हैं। इस बीच न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा है कि बाबा के दरबार में दान देने या भोग चढ़ाने पर कोई मनाही नहीं है। बशर्ते दानदाता के पास चढ़ाई गई वस्तुओं का रिकार्ड होना चाहिए। उन्होंने इस मसले को सड़क पर न ले जाकर न्यास परिषद में रखकर सुलझाने की सलाह दी है।
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न्यास के सदस्य प्रदीप ने शनिवार को अध्यक्ष को संबोधित पत्र मुख्यमंत्री, धर्मार्थ कार्य मंत्री, प्रमुख सचिव धर्मार्थ कार्य, मंडलायुक्त को भेजा है। उन्होंने कहा है कि दानदाता अजय शर्मा खुलेआम न्यासियों को चुनौती दे रहे हैं कि वह जो चाहेंगे कर लेंगे, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस तरह का ह्वाट्स एप पर अजय शर्मा की ओर से भेजे गए हैं। प्रदीप का कहना है कि अजय मंदिर के अधिकारियों, कर्मचारियों की शह पर अपना वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। इसमें भंडारी भी संलिप्त हैं। वह इस तरह की मनमानी हरगिज नहीं होने देंगे। मंदिर प्रशासन के पास पर्याप्त धन है। ऐसे में भोग के लिए किसी दानदाता से मदद लेने की जरूरत नहीं है।
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उधर, अजय का कहना है कि बाबा का दरबार भक्तों के लिए सेवा, भाव के लिए हमेशा खुला रहा है। किसी भक्त को भोग-प्रसाद की व्यवस्था करने से मना नहीं किया जा सकता। दोपहर के वक्त न्यासी प्रदीप और अजय दोनों ने न्यास अध्यक्ष से अलग-अलग मुलाकात भी की, लेकिन विवाद का हल नहीं निकल सका। अब एक-दूसरे को देख लेने की धमकियां तक दी जाने लगी हैं।
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