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घाटों-मंदिरों की सफाई अब आउटसोर्सिगिंग से
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Fri, 23 Jan 2015 12:52 AM IST
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काशी के घाटों, मंदिरों और पर्यटन स्थलों पर पेयजल व्यवस्था और साफ-सफाई अाउटसोर्सिगिं से कराई जाएगी। इसकी रूपरेखा हेरिटेज सिटी डेवलपमेंट एंड अॉगमेंटेशन योजना (हृदय) के तहत तैयार की जा रही है। नगर निगम प्रशासन के अनुसार दस दिन के अंदर इसकी फाइनल डीपीआर शहरी विकास मंत्रालय को भेज दी जाएगी।
दरअसल, ‘हृदय’ के तहत धरोहरों के संरक्षण और विकास के साथ ही वहां चौबीसों घंटे साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था की जानी है। पहले से संसाधनों और कर्मचारियों से जूझ रहे नगर निगम के लिए फिलहाल योजना के कार्यान्वयन की खातिर आउटसोर्सिगिं के अलावा कोई विकल्प नहीं है। नगर निगम प्रशासन इसकी पूरी रूपरेखा तैयार करने में जुटा है कि चौबीसों घंटे साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था के लिए कितने कर्मचारी और संसाधनों की जरूरत होगी।
शहरी विकास मंत्रालय की बैठक में शामिल होकर नई दिल्ली से लौटे महापौर के सलाहकार राजकुमार अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि ‘हृदय’ के तहत सफाई और पेयजल व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत होगी। फिलहाल आउटसोर्सिगिं के जरिये ये व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जाएंगी। योजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) नगर निगम की सलाहकार संस्था प्लानर इंडिया तैयार कर रही है।
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सफाई और पेयजल के बाद गंगा घाटों, प्राचीन कुंडों, मंदिरों सहित अन्य पर्यटन स्थलों की बिजली व्यवस्था पर काम होगा। इन स्थानों से तारोें का जखीरा हटेगा और भूमिगत केबिल बिछाई जाएगी। इसके बाद धरोहरों के आसपास शौचालय, जलनिकासी, यातायात और सुरक्षा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के मुकम्मल इंतजाम किए जाएंगे।
लागू होगी जीरो एडवरटाइजिंग पालिसी
काशी की सड़कों, घाटों, मंदिरों सहित सभी पर्यटन स्थलों पर जीरो एडवरटाइजिंग पालिसी (विज्ञापन मुक्त क्षेत्र) लागू की जाएगी। अपर नगर आयुक्त बीके द्विवेदी ने बताया कि इसके लिए पांचों जोनल अधिकारियों को निर्देश जारी किया जा चुका है। शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश के अनुसार इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। जल्द ही ऐतिहासिक, पुरातात्विक सहित पर्यटन से जुड़े सभी स्थलों और उनके आसपास कार्रवाई शुरू की जाएगी।
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दरअसल, ‘हृदय’ के तहत धरोहरों के संरक्षण और विकास के साथ ही वहां चौबीसों घंटे साफ-सफाई और पेयजल की व्यवस्था की जानी है। पहले से संसाधनों और कर्मचारियों से जूझ रहे नगर निगम के लिए फिलहाल योजना के कार्यान्वयन की खातिर आउटसोर्सिगिं के अलावा कोई विकल्प नहीं है। नगर निगम प्रशासन इसकी पूरी रूपरेखा तैयार करने में जुटा है कि चौबीसों घंटे साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था के लिए कितने कर्मचारी और संसाधनों की जरूरत होगी।
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शहरी विकास मंत्रालय की बैठक में शामिल होकर नई दिल्ली से लौटे महापौर के सलाहकार राजकुमार अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि ‘हृदय’ के तहत सफाई और पेयजल व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों और संसाधनों की जरूरत होगी। फिलहाल आउटसोर्सिगिं के जरिये ये व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जाएंगी। योजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) नगर निगम की सलाहकार संस्था प्लानर इंडिया तैयार कर रही है।
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सफाई और पेयजल के बाद गंगा घाटों, प्राचीन कुंडों, मंदिरों सहित अन्य पर्यटन स्थलों की बिजली व्यवस्था पर काम होगा। इन स्थानों से तारोें का जखीरा हटेगा और भूमिगत केबिल बिछाई जाएगी। इसके बाद धरोहरों के आसपास शौचालय, जलनिकासी, यातायात और सुरक्षा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के मुकम्मल इंतजाम किए जाएंगे।
लागू होगी जीरो एडवरटाइजिंग पालिसी
काशी की सड़कों, घाटों, मंदिरों सहित सभी पर्यटन स्थलों पर जीरो एडवरटाइजिंग पालिसी (विज्ञापन मुक्त क्षेत्र) लागू की जाएगी। अपर नगर आयुक्त बीके द्विवेदी ने बताया कि इसके लिए पांचों जोनल अधिकारियों को निर्देश जारी किया जा चुका है। शहरी विकास मंत्रालय के निर्देश के अनुसार इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। जल्द ही ऐतिहासिक, पुरातात्विक सहित पर्यटन से जुड़े सभी स्थलों और उनके आसपास कार्रवाई शुरू की जाएगी।