बिजली विभाग के सारे दावे फेल: सिर्फ कागजों में काम, मरम्मत में बीत गई गर्मी, औसतन रोज पांच बार ट्रिपिंग
Varanasi News: बिजली निगम की ओर से लगातार तीन महीनों में मरम्मत और लाइन सुधार के लिए 50 बार शटडाउन लिया गया। बावजूद कई इलाकों में रोज ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और फीडर फॉल्ट की शिकायतें आती रहीं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हर साल गर्मी शुरू होने से पहले बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, ताकि पीक सीजन में निर्बाध आपूर्ति मिल सके। काम सिर्फ कागजों तक सिमट जाते हैं। इस बार भी अप्रैल से जून तक भीषण गर्मी मरम्मत में ही बीत गई। यही नहीं शहर के कई इलाकों में शटडाउन, ट्रिपिंग और फॉल्ट का सिलसिला चलता रहा।
लोगों को जब सबसे ज्यादा बिजली की जरूरत थी, उसी समय घंटों बिजली गुल होने से उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी। सबसे अधिक रात में लोग परेशान हुए। बिजली निगम की ओर से लगातार तीन महीनों में मरम्मत और लाइन सुधार के लिए 50 बार शटडाउन लिया गया। बावजूद कई इलाकों में रोज ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और फीडर फॉल्ट की शिकायतें आती रहीं।
सड़कों के चौड़ीकरण, इंटरनेट व बिजली की अंडरग्राउंड केबलिंग से भी काम के समय शटडाउन लिए गए। तीन महीने में शहर के 30 इलाकों में रोज ट्रिपिंग और बिजली कटौती जारी रही। इस बीच ट्रांसफार्मर मरम्मत और तार बदलने के दावे किए गए, लेकिन तापमान 45 डिग्री के पार पहुंचते ही पूरी व्यवस्था ध्वस्त दिखी। कुछ दिनों पहले ही जिले में 20 से ज्यादा ट्रांसफॉर्मर जले थे जिससे शहर से गांव तक ट्रिपिंग और कटौती ने लोगों की नींद उड़ा दी थी। शहर में 4 से 5 बार और गांव में 10 से 12 बार ट्रिपिंग हो रही है।
बिजली निगम के अधिकरियों के अनुसार रात को घरों में एसी, कूलर व अन्य इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग बढ़ने से लोड बढ़ जाता है। गर्मी में रोज औसतन बिजली की खपत 800 मेगावाट तक रहती है। वह बढ़कर 915 मेगावाट तक पहुंच गई। मानसून के दस्तक देते ही कटौती सामान्य हो जाएगी। तब मौसम भी लोगों का साथ देगा। लोगों का कहना है कि सर्दियों या गर्मी शुरू होने से पहले पर्याप्त तैयारी कर ली जाती तो भीषण गर्मी के दौरान बार-बार आपूर्ति बाधित नहीं होती।
शहर के चांदपुर, मंडुवाडीह, चौकाघाट, बेनिया, चेतगंज के चौरछठवां, कंदवा, भगवानपुर, चितईपुर, पांडेयपुर, नदेसर, सुंदरपुर, लंका, नरिया, दुर्गाकुंड, सोयेपुर, लालपुर, ओमनगर, पहड़िया, सामनेघाट, लहरतारा, औरंगाबाद, चौकाघाट में सबसे अधिक ट्रांसफॉर्मर जले। प्रमुख कारण लोड बढ़ना था। जो कि समय रहते नहीं बढ़ाया गया। मौसम में थोड़ा सुधार होते ही बिजली व्यवस्था में भी सुधार देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को कराई गई पड़ताल में चौबेपुर, वरुणापार, लोहता, बड़ागांव, रोहनिया, कछवां, राजातालाब में आपूर्ति सामान्य मिली।