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छठ महापर्वः उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अखंड सौभाग्य का लिया आशीर्वाद, गूंजे छठ मइया के जयकारे
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Wed, 14 Nov 2018 10:17 PM IST
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- फोटो : amar ujala
डाला छठ के अंतिम दिन श्रद्धालु छठ की महिमा के गीत गाते हुए सूप और दौरा के साथ नदी और सरोवर घाटों पर रात में ही पहुंच गए और पानी में खड़े होकर भागवान सूर्य का इंतजार करने लगे। भोर में जैसे ही सूर्य देव की लालिमा दिखी उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। फिर क्या, उदयमान सूर्य को अर्घ देने का सिलसिला शुरू हो गया। पुत्रों, पतियों, संग बेटी, भाभी सभी ने अर्घ्य दिलाया। इसके बाद व्रती महिलाओं ने सुहागिनों की मांग सिंदूर से भरने के बाद उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद भी दिया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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काशी के हर घाट, चाहे गंगा के हों या सरोवरों और तालाबों के, हर जगह यह नजारा इस महापवर् की अगाध आस्था का गवाह बना। आस्था का पर्व छठ बुधवार को उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही सम्पन्न हो गया।
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इस दौरान अस्सी घाट, तुलसी घाट, दशाश्वमेध घाट, शीतला घाट, राज घाट, शास्त्री घाट सहित अन्य घाटों पर रेला उमड़ा रहा। सूर्योदय होने के बाद व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन और फिर अर्घ्य देकर भगवान सूर्य से सुख, समृद्धि की कामना की। घर पहुंचकर भी महिलाओं ने गीत गाकर छठ मइया का गुणगान किया।
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- फोटो : amar ujala
नहाय खाय के साथ शुरू चार दिन के इस महापर्व में मंगलवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आधी रात से ही व्रती महिलाएं परिवारीजनों के साथ घाटों पर पहुंचने लगीं।
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सिर पर दउरा लेकर छठ के गीत गाते लोग गाजे-बाजे के साथ घाटों की ओर बढ़ते चले जा रहे थे। इसके अलावा कुछ लोग तो पूरी रात ही वेदी के पास दीप जलाकर बैठे रहे। सुबह करीब सवा छह बजे सूर्योदय हुआ, इसके घंटे भर पहले से ही व्रती महिलाएं फल, ठेकुआ, मिठाई से भरा सूप लेकर पानी में खड़ी रहीं।