बीएचयू: महामना की बगिया में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव पर कुलसचिव से मिले छात्र
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को साक्षात्कार के दौरान हिंदी भाषी प्रतिभागियों के साथ भेदभाव के आरोप में छात्रों ने सेंट्रल ऑफिस पर प्रदर्शन किया। इस दौरान छात्रों ने कुलसचिव से भी मुलाकात की।
इस दौरान छात्रों ने कुल सचिव को शिकायती पत्र सौंपा। जिसमें लिखा कि बीएचयू में चल रही नियुक्तियों के साक्षात्कार में दर्शन, इतिहास, प्राचीन इतिहास, संस्कृत आदि कई विभागों के हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ लगातार भेदभाव जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इस व्यवहार से भारतीय संविधान और राज्य भाषा हिंदी का अपमान हो रहा है।
इस दौरान मृत्युंजय तिवारी, उत्कर्ष द्विवेदी, विवेक तिवारी, वैभव कृष्ण तिवारी, अभिनंदन राय, अभिषेक सिंह, दिलीप मौर्य, आलोक कुमार सिंह और आलोक कुमार यादव मौजूद रहे।
अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कुलपति पर मौलिक अधिकार और मानवाधिकार हनन का भी आरोप लगाया। अभ्यर्थियों का कहना था कि कुलपति ने हिंदी भाषी अभ्यर्थियों को अधिकतम तीन से चार मिनट में साक्षात्कार कक्ष से बाहर निकाल दिया। कुलपति के इस व्यवहार से हिंदी भाषी अभ्यर्थियों में न सिर्फ गुस्सा है, बल्कि वह स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं।
शुक्रवार को होलकर भवन में प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति व पुरातत्व विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद पर साक्षात्कार का आयोजन किया गया था। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कुलपति ने उनको हिंदी भाषा में साक्षात्कार देने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में साक्षात्कार की आवश्यकता नहीं है। बता दें कि कला संकाय के प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में लगभग 95 फीसदी छात्र हिंदी भाषी हैं।
अभ्यर्थी डॉ. कर्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने कुलपति से इस पर आपित्त दर्ज कराई। बावजूद इसके कुलपति ने सिर्फ अंग्रेजी में साक्षात्कार का दबाव बनाया बल्कि मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। डॉ. कर्ण कुमार ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 अभिव्यक्ति की आजादी के तहत यह अधिकार देता है कि वो किसी भी भाषा में अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत कर सकते हैं।
इतना ही नहीं यूनिवर्सल डिक्लेरेशन ऑफ ह्यूमन राइट के आर्टिकल-2 में स्पष्ट उल्लेख है कि किसी भी व्यक्ति को भाषा, धर्म, लिंग इत्यादि के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है। इस संदर्भ में जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने बताया कि बीएचयू के अभ्यर्थियों को अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है। साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के आरोप के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।