वाराणसी नगर निगम सदन में 98466.77 लाख का बजट पास
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नगर निगम सदन की बैठक में शनिवार को वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट पर चर्चा के बाद मंजूरी दे दी गई। शहर के बुनियादी विकास और नागरिक सुविधाओं के मद्देनजर सदन में 98466.77 लाख का बजट पास हो गया। इतने ही रुपये का व्यय का भी बजट नगर निगम ने रखा है।
यानी बिना हानि-लाभ वाला बजट सदन में सर्वसम्मति से पास हो गया। सदन की कार्यवाही 12 बजे शुरू हुई। पहले वंदेमातरम पर हंगामा खड़ा हो गया। करीब आधे घंटे तक चले हंगामे के बाद भाजपा के पार्षद नरसिंह दास ने बजट सिलसिलेवार बजट पढ़ा।
मूल बजट 98466.77 लाख के सापेक्ष 78811.22 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट भी रखा गया। इसी तरह जलकल विभाग का भी बजट पास हो गया। 11799.81 लाख के बजट पर सदन ने मुहर लगा दी। सदन में बजट में इस बार जनता पर अलग से कोई बोझ नहीं थोपा गया है।
सदन में बजट के दौरान नगर निगम की ओर से कार्यों की प्राथमिकताएं शामिल नहीं किए जाने पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। सदस्यों का कहना कहना था कि नागरिकों की जरूरी आवश्यकताएं क्या हैं, नगर निगम पहले किन कार्यों को कराएगा। इसका जवाब चाहिए।
इस पर अध्यक्ष मोहले के निर्देश पर नगर आयुक्त श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि कार्र्यों की प्राथमिकताएं तय कर इसे सदन के सामने रखा जाएगा।
यहां होंगे खर्च
29355.55 लाख-सड़क, बिजली, पानी, यातायात पर फुटपाथ, कुंड, तालाब, पार्क, गोशाला, सफाई, जल निकासी, मेला/उत्सव, गली और उद्यान समेत कई मदों में होगा खर्च
1855.55 लाख- आउटसोर्सिंग मजदूर, आकस्मिक व्यय, मेयर विवेकाधीन फंड, वाहनाें का किराया, कर, बीमा के मद में खर्च की जाएगी
21311.00 लाख-अधिकारियों-कर्मचारियाें के वेतन, सभासदों के मानदेय, बोनस, मजदूरी संविदा, पेंशन के लिए रखा गया है। इसके अलावा अन्य मदों में भी धनराशि खर्च की जानी है।
44 लाख मिले तो सफाई और सीवेज में हो सुधार
सीवेज की समस्या से जूझ रहे शहरियों के मुद्दे को सदन में उठाया गया। पार्षदों ने मांग की कि इसे दुरुस्त किया जाए। सीताराम ने कहा कि गली और हाउस पिट के लिए नगर निगम में कर्मचारी तैनात है लेकिन काम नहीं करते।
इस पर जलकल विभाग ने कहा कि सीवेज और जलमूल्य से महीने में 14.50 लाख की आमदनी होती है। लेकिन इसकी मरम्मत के लिए महीने मेें 44 लाख रुपये की जरूरत है। यदि महीने में यह धनराशि मिले तो प्रत्येक वार्र्ड में तीन कर्मचारी और एक सुपरवाइजर की तैनाती की जाए जिससे इसकी निगरानी हो सके।