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बीएचयू में पुस्तक प्रकाशन प्रशिक्षण का शुभारंभ
टीम डिजिटल,वाराणसी
Updated Thu, 16 Feb 2017 12:42 AM IST
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मुख्य अतिथि एनबीटी के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) और यूजीसी-मानव संसाधन विकास केंद्र बीएचयू की ओर से बुधवार को आठ दिवसीय पुस्तक प्रकाशन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि एनबीटी के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय बोलियों में अच्छे साहित्य की बेहद जरूरत है।
प्रतिभागियों से कहा, कॅरियर आपको अच्छा पद और पैकेज तो दिला सकते हैं लेकिन अच्छा मनुष्य बनना किताबें ही सिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाशन क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। कौशल विकास के तहत सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स के बाद युवाओं के पास कॅरियर के कई विकल्प हैं।
विशिष्ट अतिथि आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने कहा कि नए तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। एनबीटी और एनसीईआरटी की पुस्तकों का कलेवर बदलकर उसे और आकर्षित बनाने की जरूरत है ताकि बच्चों की रुचि बढ़े।
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सभी पुस्तकों का ई-कंटेंट तैयार किया जाना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि पुस्तक लेखन का भी एक पाठ्यक्रम होना चाहिए।
साहित्य किसने लिए लिखा जा रहा है, कौन लिख रहा है, क्या लिख रहा है, इन आयामों पर गहन चिंतन होना चाहिए। संचालन यूजीसी-एचआरडीसी के उप निदेशक डॉ. एसके तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन कोर्स डायरेक्टर नरेंद्र कुमार ने किया।
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प्रतिभागियों से कहा, कॅरियर आपको अच्छा पद और पैकेज तो दिला सकते हैं लेकिन अच्छा मनुष्य बनना किताबें ही सिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाशन क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं। कौशल विकास के तहत सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स के बाद युवाओं के पास कॅरियर के कई विकल्प हैं।
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विशिष्ट अतिथि आईआईटी बीएचयू के पूर्व निदेशक प्रो. एसएन उपाध्याय ने कहा कि नए तकनीकी शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए। एनबीटी और एनसीईआरटी की पुस्तकों का कलेवर बदलकर उसे और आकर्षित बनाने की जरूरत है ताकि बच्चों की रुचि बढ़े।
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सभी पुस्तकों का ई-कंटेंट तैयार किया जाना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि पुस्तक लेखन का भी एक पाठ्यक्रम होना चाहिए।
साहित्य किसने लिए लिखा जा रहा है, कौन लिख रहा है, क्या लिख रहा है, इन आयामों पर गहन चिंतन होना चाहिए। संचालन यूजीसी-एचआरडीसी के उप निदेशक डॉ. एसके तिवारी व धन्यवाद ज्ञापन कोर्स डायरेक्टर नरेंद्र कुमार ने किया।