कोरोना वायरस भगाने को यहां अंधविश्वास में डूबी महिलाएं, कोरोनामाई की कर रहीं पूजा-अर्चना
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ऐसे समय में जब पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए वैक्सीन या दवा की खोज में लगे हुए हैं। ग्रामीण इलाकों की महिलाएं लगातार दो सप्ताह तक सोमवार व शुक्रवार को कोरोनामाई की पूजा कर उन्हें भगाने का दावा करती नजर आ रही हैं।
बलिया जिले के द्वाबा क्षेत्र में अब कोरोना माई की पूजा का विडियो सोशल साइट्स पर वायरल हो रहा है। इसमे एक महिला बिहार के बरौनी में एक गाय के औरत के रूप में प्रकट होकर खुद को करोनामाई बताने की बात कही जा रही है। महिला बता रही है कि पूजा के रूप लड्डू, फूल छाक चढ़ाने से करोना महामारी दो सप्ताह में भाग जाएगी।
उन्हें क्षेत्रों में फैला रहे वीडियो जहां अभी नहीं पहुंची शिक्षा की किरणें :
इस वीडियो को जानबूझ कर उन्हीं इलाकों में फैलाया जा रहा है, जहां अभी भी शिक्षा की किरणें पूरी तरह से नहीं पहुंच सकी हैं। ग्रामीण महिलाएं तेजी से इस अंधविश्वास के चक्रव्यूह में फंस रही हैं और गांव में कोरोनामाई की पूजा प्रारंभ हो गई है।
गंगा दशहरा के दिन भी जिले के द्वारा क्षेत्र के कई गांवों में गंगा स्नान के बाद महिलाओं ने कोरोनामाई की पूजा अर्चना की। इसे लेकर जब उन्हें समझाने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि इसे मजाक में लेने वालों के साथ कोरोनामाई बहुत बुरा व्यवहार करेंगी।
बलिया जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ बीपी सिंह ने बताया कि कोरोनामाई को लेकर जो वीडियो वायरल हुआ है वह पूरी तरह से मिथ्या है। अंधविश्वास में किसी भी महिला व पुरुष को नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि कोरोना एक वायरस है। अभी तक इसकी कोई दवा नहीं बनी है। शासन प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन पर ध्यान दें, अंधविश्वास पर नहीं। अन्यथा आप ठगी के शिकार हो सकते हैं।
जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि कोरोना एक वायरस है। इसे लेकर जो साइंटिफिक फैक्ट हैं उसके अनुसार जो सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है वह जरूरी है। शासन प्रशासन के निर्देशों का पालन करके ही कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है।