बी एच यू में अब चलेगा "काशी स्टडीज" पीजी कोर्स, पढ़ाया जाएगा लंगड़ा आम से लेकर बिस्मिल्लाह खान की तान के बारे में
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काशी की धर्म,कला,संस्कृति के बारे में अब बीएचयू में नया पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। सामाजिक विज्ञान संकाय के तहत "काशी स्टडीज" नाम से चलने वाले इस पाठ्यक्रम की रूपरेखा बन चुकी है। इसी सप्ताह में इस पर फैसला भी हो जाएगा। अगले महीने इसको विद्दत परिषद की बैठक में भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
विश्वविद्यालय में अगले सत्र से सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग में परास्नातक स्तर पर काशी स्टडी कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। संकाय प्रमुख प्रो. कौशल किशोर मिश्र ने बताया कि नए कोर्स काशी स्टडीज के माध्यम से काशी के गूढ़ रहस्य को जानने का मौका मिलेगा।
इसमे काशी में देव दीपावली सहित अन्य बड़े आयोजनों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही काशी की जीवंतता की मिसाल शहर की गलियों, धर्म संस्कृति, संगीत परंपरा आदि के बारे में छात्र न केवल जान सकेंगे बल्कि इस पर शोध भी कराया जाएगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गठित कमेटी ने नए कोर्स की रूपरेखा तैयार कर ली है और इसी सप्ताह बैठक में पाठ्यक्रम पर मुहर लगने की संभावना है। 30 दिसंबर तक सभी औपचारिकता पूरी होने के बाद अगले महीने जनवरी माह में होने वाली विद्दत परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को रखा जाएगा। जहां स्वीकृति के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
चार सेमेस्टर में इस पर होगा अध्ययन
दो साल में चार सेमेस्टर में काशी की संस्कृति छात्र काशी की संस्कृति, इतिहास, परंपरा, धार्मिक महत्व, बनारसी फक्कड़पन, रहन-सहन और काशी की थाती जैसे गुलाबी मीनाकारी, बनारसी रेशम के उत्पाद, बनारसी पान, लकड़ी के खिलौने, लंगड़ा आम को करीब से जान सकेंगे।
इसके अलावा तुलसीदास, कबीर, प्रेमचंद, बुद्ध, रैदास को भी नई पीढ़ी समझें, ये कोर्स उन्हें इस ऐतिहासिक शहर की धरोहरों की सारी जानकारियां देगी। साथ ही भारत रत्न बिस्मिल्लाह खान के शहनाई की तान, पद्म सम्मानित पंडित किशन महाराज की तबले की थाप के साथ ही बनारस घराने की संगीत की सुर-लय और ताल को भी समझने का मौका मिलेगा।