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बीएचयू के कुलपति बोले, बोले चुनौतियों का सामना करें, सफलता के शिखर पर पहुंचे
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Jan 2015 02:14 AM IST
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वाराणसी। बीएचयू के कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने सोमवार को युवा दिवस पर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि 19वीं सदी के आरंभ में राष्ट्र के समक्ष जो चुनौतियां थीं, आज भी उससे कमतर चुनौतियां नहीं हैं। बावजूद इसके, इन चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए हर क्षेत्र में सफलता हासिल करें और विश्व पटल पर भारत को सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करें। वह पहली बार विद्यार्थियों से स्वतंत्रता भवन में रूबरू हो रहे थे।
कुलपति ने कहा कि विकृतियां उत्पन्न होना प्राकृतिक है लेकिन विकृतियों का प्रभावी होना व्यक्ति पर निर्भर करता है। हमें विकृतियों से डरने की जरूरत नहीं। व्यक्ति सज्जनता के लिए दृढ़ संकल्पित हो तो विकृतियों का शमन सहज ही हो जाता है। कहा कि दुर्जनों की दुर्जनता से उतनी हानि नहीं होती
जितनी सज्जनों की निष्क्रियता से होती है। इसलिए मुझे अपेक्षा है कि आप सदा सक्रिय रह कर पूरी दुनिया में विश्वविद्यालय की कीर्ति फैलाएंगे। आह्वान किया कि आप परिसर का वातावरण ऐसा बनाएं कि विश्व के लोग इस विश्वविद्यालय का हिस्सा बनने में गर्व महसूस करें। छात्र-छात्राओं को विश्वास दिलाया कि मैं आपके हितों में निर्णय लेने में पीछे नहीं रहूंगा।
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कुलपति ने कहा कहा कि 19वीं शताब्दी का छठवां दशक तीन महान विभूतियों का अवतरित करने वाला था। स्वामी विवेकानंद, पं. मदनमोहन मालवीय और महात्मा गांधी ने इस दशक में जन्म लेकर अपने ढंग से राष्ट्र को नई दिशा दी। आप इन विभूतियों द्वारा तय की गई दिशा पर चलें और उनके
विचारों को आत्मसात करें तो सफलता के शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। संचालन एवं स्वागत विज्ञान संकाय के छात्र सलाहकार प्रो. एसके त्रिगुण और धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक छात्र अधिष्ठाता प्रो. केके सिंह ने किया। समन्वय संयुक्त कुलसचिव (सामान्य प्रशासन) संजय कुमार का रहा।
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कुलपति ने कहा कि विकृतियां उत्पन्न होना प्राकृतिक है लेकिन विकृतियों का प्रभावी होना व्यक्ति पर निर्भर करता है। हमें विकृतियों से डरने की जरूरत नहीं। व्यक्ति सज्जनता के लिए दृढ़ संकल्पित हो तो विकृतियों का शमन सहज ही हो जाता है। कहा कि दुर्जनों की दुर्जनता से उतनी हानि नहीं होती
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जितनी सज्जनों की निष्क्रियता से होती है। इसलिए मुझे अपेक्षा है कि आप सदा सक्रिय रह कर पूरी दुनिया में विश्वविद्यालय की कीर्ति फैलाएंगे। आह्वान किया कि आप परिसर का वातावरण ऐसा बनाएं कि विश्व के लोग इस विश्वविद्यालय का हिस्सा बनने में गर्व महसूस करें। छात्र-छात्राओं को विश्वास दिलाया कि मैं आपके हितों में निर्णय लेने में पीछे नहीं रहूंगा।
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कुलपति ने कहा कहा कि 19वीं शताब्दी का छठवां दशक तीन महान विभूतियों का अवतरित करने वाला था। स्वामी विवेकानंद, पं. मदनमोहन मालवीय और महात्मा गांधी ने इस दशक में जन्म लेकर अपने ढंग से राष्ट्र को नई दिशा दी। आप इन विभूतियों द्वारा तय की गई दिशा पर चलें और उनके
विचारों को आत्मसात करें तो सफलता के शिखर तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। संचालन एवं स्वागत विज्ञान संकाय के छात्र सलाहकार प्रो. एसके त्रिगुण और धन्यवाद ज्ञापन कार्यवाहक छात्र अधिष्ठाता प्रो. केके सिंह ने किया। समन्वय संयुक्त कुलसचिव (सामान्य प्रशासन) संजय कुमार का रहा।