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पुआल बायोमास से खाद विकास का मॉडल उपयोगी
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वाराणसी।
बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में चल रहे भारतीय कृषि विज्ञान समाज के 84वें वार्षिक सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन कृषि क्षेत्र में तकनीक पर चर्चा हुई। नेशनल रेनफेड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व सीईओ डॉ. जेएस समरा ने पुआल जलाने के बजाय चावल बायोमैस के वैकल्पिक उपयोग की जानकारी दी। कहा कि मृदा स्वास्थ्य, धन और रोजगार सृजन में सुधार के लिए पुआल बायोमास से खाद विकास का मॉडल उपयोगी है।
शताब्दी कृषि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डॉ डीके दास ने भारतीय कृषि में उपेक्षित सूक्ष्म पोषक के रूप में बोरान की चर्चा की।आईसीएआर के एडीजी डॉ.एसके चौधरी ने मृदा स्वास्थ्य, राष्ट्रीय विपणन मंच, मौसम अनुक्रमित बीमा और डिजिटल कृषि के हस्तक्षेप के साथ डिजिटल मृदा विज्ञान पर विस्तृत रोड मैप पर चर्चा की। कहा कि यह आधुनिक प्रजनन कार्यक्रमों, मॉडल प्राथमिकताओं में मदद करने के साथ ही भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग करके प्रगति को ट्रैक करेगा और मशीन-लर्निंग को जटिल डेटा को क्रियाशील बनाने के लिए लागू करेगा। इस दौरान निदेशक डॉ. रमेश चंद्र ने भारत के चावल कृषि खाद्य प्रणालियों में मृदा प्रबंधन विकल्प को स्थानांतरित करने पर चर्चा की।
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बीएचयू कृषि विज्ञान संस्थान में चल रहे भारतीय कृषि विज्ञान समाज के 84वें वार्षिक सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन कृषि क्षेत्र में तकनीक पर चर्चा हुई। नेशनल रेनफेड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व सीईओ डॉ. जेएस समरा ने पुआल जलाने के बजाय चावल बायोमैस के वैकल्पिक उपयोग की जानकारी दी। कहा कि मृदा स्वास्थ्य, धन और रोजगार सृजन में सुधार के लिए पुआल बायोमास से खाद विकास का मॉडल उपयोगी है।
शताब्दी कृषि सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डॉ डीके दास ने भारतीय कृषि में उपेक्षित सूक्ष्म पोषक के रूप में बोरान की चर्चा की।आईसीएआर के एडीजी डॉ.एसके चौधरी ने मृदा स्वास्थ्य, राष्ट्रीय विपणन मंच, मौसम अनुक्रमित बीमा और डिजिटल कृषि के हस्तक्षेप के साथ डिजिटल मृदा विज्ञान पर विस्तृत रोड मैप पर चर्चा की। कहा कि यह आधुनिक प्रजनन कार्यक्रमों, मॉडल प्राथमिकताओं में मदद करने के साथ ही भू-स्थानिक विश्लेषण का उपयोग करके प्रगति को ट्रैक करेगा और मशीन-लर्निंग को जटिल डेटा को क्रियाशील बनाने के लिए लागू करेगा। इस दौरान निदेशक डॉ. रमेश चंद्र ने भारत के चावल कृषि खाद्य प्रणालियों में मृदा प्रबंधन विकल्प को स्थानांतरित करने पर चर्चा की।
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