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जीवाश्मों से मिलती है जलवायु परिवर्तन की सटीक जानकारी
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बीएचयू के भौमिकी विभाग की ओर से तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आईसीएमएस-2019 के पहले दिन वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन और इसके प्रभाव पर चर्चा की। मुख्य अतिथि भू गर्भ वैज्ञानिक प्रो. अशोक साहनी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को समझने में जीवाश्मों की उपयोगिता अहम है। इसी से परिवर्तन के बारे में सटीक जानकारी मिलती है।
विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी सभागार में सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने किया। अध्यक्षता करते हुए प्रो. पीके सरस्वती ने पराजलवायु और जलवायु परिवर्तन के कारकों को समझने में जैविक नियंत्रण को जरूरी बताया। यूएसए से आए प्रो. जेरी लिप्स ने जीवाश्म, जैविक विकास एवं जलवायु परिवर्तन के संबंधों की चर्चा की। संयोजक प्रो. अरुण देव सिंह और सह संयोजक प्रो. विंध्याचल पांडेय ने बीएचयू में 16 साल बाद होने वाले इस सम्मेलन को युवा वैज्ञानिकों के लिए अहम बताया।
इस दौरान विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संसाधनों की खोज के बारे में बताया। कार्यक्रम में भौमिकी विभागाध्यक्ष प्रो. आरके श्रीवास्तव ने विभाग की उपलब्धियां गिनाई प्रो. एमवी श्रीनिवासन का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रो. पीके सिंह, प्रो. वी पांडेय, डॉ. कोमल वर्मा, डॉ. प्रेमराज आदि मौजूद रहे।
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विज्ञान संस्थान के संगोष्ठी सभागार में सम्मेलन का उद्घाटन कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने किया। अध्यक्षता करते हुए प्रो. पीके सरस्वती ने पराजलवायु और जलवायु परिवर्तन के कारकों को समझने में जैविक नियंत्रण को जरूरी बताया। यूएसए से आए प्रो. जेरी लिप्स ने जीवाश्म, जैविक विकास एवं जलवायु परिवर्तन के संबंधों की चर्चा की। संयोजक प्रो. अरुण देव सिंह और सह संयोजक प्रो. विंध्याचल पांडेय ने बीएचयू में 16 साल बाद होने वाले इस सम्मेलन को युवा वैज्ञानिकों के लिए अहम बताया।
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इस दौरान विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी ने जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संसाधनों की खोज के बारे में बताया। कार्यक्रम में भौमिकी विभागाध्यक्ष प्रो. आरके श्रीवास्तव ने विभाग की उपलब्धियां गिनाई प्रो. एमवी श्रीनिवासन का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में प्रो. पीके सिंह, प्रो. वी पांडेय, डॉ. कोमल वर्मा, डॉ. प्रेमराज आदि मौजूद रहे।
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