BHU: दो शोधकर्ताओं को कजाकिस्तान में मिला सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति पुरस्कार, जानें इसकी खासियत
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के दो शोधार्थियों की इस उपलब्धि को लेकर काफी चर्चाएं हैं। पर्यावरणीय स्थिरता: नवाचार, चुनौतियां और समाधान सम्मेलन उन्होंने शोध की प्रस्तुति दी थी।
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बीएचयू की डाॅ. ज्योति सिंह और शोधार्थी हिमांशु पाठक को कजाकिस्तान में सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति पुरस्कार दिया गया। बीएचयू के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान आईईएसडी के इन दो शोधकर्ताओं ने कजाकिस्तान के अल-फाराबी कजाख नेशनल यूनिवर्सिटी, अल्माटी में आयोजित पर्यावरणीय स्थिरता: नवाचार, चुनौतियां और समाधान सम्मेलन में कई शोध प्रस्तुत किए।
आईईएसडी की शोध सहायक डाॅ. ज्योति सिंह ने भिंडी में खारेपन से हुई समस्याओं से निपटने के लिए हैलोटॉलरेंट पीजीपीआर के माध्यम से धारणीय कृषि पद्धतियां शीर्षक पर हुए अपने शोध पत्र पढ़ा। भारत के कई क्षेत्रों में मिट्टी में बढ़ता खारापन कृषि उत्पादकता के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। यह शोध मिट्टी के स्वास्थ्य सुधारने, पौधों की सहनशीलता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक है।
आईईएसडी के शोधार्थी हिमांशु पाठक ने नदी के जल से सिंचाई का मृदा स्वास्थ्य और पादप जैवरसायन पर प्रभाव: इंडो-गैंगेटिक मैदानी क्षेत्र का एक अध्ययन विषय पर शोध प्रस्तुत किया। बताया कि नदी जल से सिंचाई करने पर मिट्टी के भौतिक-रासायनिक गुणधर्म, एंजाइम गतिविधियों और पालक जैसी फसलों की जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। यह शोध धारणीय जल प्रबंधन, मृदा स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
बीएचयू के सहायक आचार्य अल-फारेबी में प्रस्तुत करेंगे शोध पत्र
बीएचयू में विधि संकाय के सहायक आचार्य डॉ. मयंक प्रताप को कजाकिस्तान में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है। वर्ल्ड रैंकिंग में 166वें स्थान पर स्थित अल-फारेबी विश्वविद्यालय, अल्माटी में न्यायालयों से जलवायु कार्रवाई तक: स्थिरता के प्रति विकसित होता न्यायिक दृष्टिकोण पर शोध प्रस्तुत करेंगे। इससे न्यायिक प्रणाली की भूमिका को रेखांकित कर सस्टनेबल संबंधी पहल को आगे बढ़ाने के साथ वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान किया जा सकेगा।