BHU News: स्वीडन के कार्लस्टाड विवि में पढ़ाई के लिए बीएचयू के छात्रों को नहीं देनी होगी फीस, पढ़ें- तीन खबरें
कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के ऑफलाइन या ऑनलाइन कोर्स के लिए बीएचयू के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कोई भी कोर्स फीस नहीं देनी होगी। इससे बीएचयू के छात्रों की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अनुसंधान के अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बीएचयू के छात्र और छात्रा अब स्वीडन के एक संस्थान में बिना फीस दिए पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए बीएचयू और स्वीडन के कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के एक पुराने समझौते का रिन्यूअल (नवीनीकरण) किया गया। दोनों विश्वविद्यालय एकेडमिक पार्टनर होंगे। इसके तहत साझा रिसर्च और सांस्कृतिक सहयोग करेंगे।
इस नए समझौते के अंतर्गत कार्लस्टाड विश्वविद्यालय के ऑफलाइन या ऑनलाइन कोर्स के लिए बीएचयू के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कोई भी कोर्स फीस नहीं देनी होगी।
इससे बीएचयू के छात्रों की अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अनुसंधान के अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सकेगी। नए समझौते ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य सहयोगात्मक अनुसंधान, संकाय और विद्यार्थियों का आदान-प्रदान, ज्वाइंट सेमिनार और ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्रोत्साहन देना है जो वैश्विक शिक्षा और शांति अध्ययन को बढ़ावा दें।
कुलपति प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मजबूत होने से शैक्षणिक उत्कृष्टता में बढ़ोतरी होगी। राष्ट्रों के बीच आपसी समझ विकसित होती है। बीएचयू में कार्लस्टाड विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिनिधिमंडल में इंडिया स्टडीज प्रोग्राम के प्रमुख प्रो. पावेल ओडिनियेक, मानविकी और सामाजिक विज्ञान संकाय की निदेशक प्रो. जोहाना एल्फग्रेन और प्रो. कारोलीना एलेगॉड मौजूद रहीं। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग समन्वयक प्रो. राजेश सिंह, मालवीय सेंटर फॉर पीस रिसर्च (एमसीपीआर) के समन्वयक प्रो. मनोज कुमार मिश्रा और डॉ. अजय यादव आदि मौजूद रहे।
आईआईटी में एआई बेस्ड ड्रग डिस्कवरी की थीम पर शुरू हुआ सम्मेलन
आईआईटी बीएचयू में मंगलवार को एआई-संचालित ड्रग डिस्कवरी थीम पर भारतीय जैव-चिकित्सा वैज्ञानिक संघ का 46वां वार्षिक सम्मेलन शुरू हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सलाहकार और पूर्व ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया डॉ. जीएन सिंह ने दवा नियमन और नीति ढांचे पर बातचीत की। निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया और डीन प्रो. राजेश कुमार के साथ एक वैज्ञानिक सार-संग्रह जारी किया।
12 राज्यों के 350 से ज्यादा प्रतिभागियों में प्रोफेसर, पीएचडी स्कॉलर्स, एमटेक और एमफार्मा और स्नातक के विद्यार्थी शामिल रहे। नौ अक्तूबर तक चलने वाले इस तीन दिन के वैज्ञानिक सत्रों में शोधकर्ता और शिक्षाविद साझा संवाद करेंगे। सम्मेलन के दौरान ऑन्कोलॉजी, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग, इम्यूनोथेरेपी, बायोथेरेप्यूटिक्स और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में बन रही दवाओं की सफलता की जानकारियां दी गईं।
एक्सोसोम-आधारित डिलीवरी सिस्टम, आरएनए थेरेप्यूटिक्स और मल्टी-टारगेट ड्रग डिजाइन के साथ ही मौखिक और पोस्टर प्रस्तुतियां दी गईं। आईएबीएमएस की अध्यक्ष डॉ. ई. पद्मिनी और महासचिव डॉ. वी. हेमामालिनी ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक नवाचार के उभरते अवसरों के बारे में बताया। इस दौरान आयोजन समिति के सदस्यों में प्रो. सेंथिल राजा, डॉ. सुनील मिश्रा, डॉ. आशीष अग्रवाल, डॉ. रजनीश आदि मौजूद रहे।
बीएचयू के सेंट्रल हिंदू बॉयज स्कूल के पूर्व छात्र विजय कुमार को यूपीएससी की भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) परीक्षा में ऑल इंडिया 10वीं रैंक मिली है। विजय कुमार 2018 में स्कूल से पढ़ाई कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने आईआईटी कानपुर से आर्थिक विज्ञान में बीएस-एमएस की पढ़ाई की। स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों में विजय की सफलता को लेकर काफी चर्चा रही। इसमें पूरे भारत से 12 लोगों का चयन किया गया है।