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बीएचयू की साख पर आंच
ब्यूरो, वाराणसी अमर उजाला
Updated Wed, 03 Feb 2016 02:04 AM IST
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में जिन मरीजों की संक्रमित इंजेक्शन लगाए जाने के बाद आंखों की रोशनी कमजोर हो गई थी, उन्हें बीएचयू की ओर से तो खूब दम दिलासा दिया गया लेकिन वह सब उनके लिए महज छलावा निकला।
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कुलपति ने उनका इलाज कराने का वादा किया था पर चंद घंटे के बाद ही उन मरीजों को कोलकाता रेफर कर दिया गया। कोलकाता से विशेषज्ञों को यहां बुलाने का कुलपति क ा आश्वासन भी कोरा साबित हुआ।
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ये आरोप पीड़ित मरीज विनोद सिंह के परिवार वालों के हैं।
उनका कहना है कि सोमवार को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने मरीजों का ढांढस बंधाया था कि उनकी हर संभव मदद की जाएगी। बीएचयू अस्पताल में ही बाहर से विशेषज्ञ बुलवाकर पीड़ितों का इलाज कराया जाएगा।
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देर शाम स्थानीय डॉक्टरों ने मरीजों का परीक्षण भी शुरू कर दिया था लेकिन बाद में उन्हीं डॉक्टरों ने उन्हें कोलकाता रेफर कर दिया।
विनोद सिंह की पत्नी ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर से चेन्नई शंकर नेत्रालय रेफर करने का अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
उनका यह भी आरोप है कि इलाज में किसी भी तरह से बीएचयू सहयोग नहीं कर रहा है। उधर, नेत्र विभाग के हेड प्रो. एमके सिंह का कहना है कि मरीज को उसके कहने पर कोलकाता रेफर किया गया है।
पीड़ित को रेल किराया और कोलकाता में इलाज पर होने वाले खर्च को वहन करने को भी विश्वविद्यालय तैयार है।
उधर, शिवपुर के हरिहर सिंह तो चेन्नई के लिए पहले ही निकल चुके हैं। उनका कहना है कि बीएचयू से अब कोई आस नहीं रही। आंखों को लेकर कोई जोखिम नहीं लिया जा सकता था, इसलिए चेन्नई जा रहे हैं।
उधर, खुद बीएचयू अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उसके यहां कोई रेटिना एक्सपर्ट नहीं है। वहीं दो अन्य पीड़ित ओबरा के राम गहन प्रजापति और मिर्जापुर के आत्मा राम तो अब तक बीएचयू के ही भरोसे बैठे हैं।
आत्मा राम कहते हैं कि वो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। इलाज के लिए कोलकाता या चेन्नई नहीं जा सकते। बीएचयू अस्पताल में ही अब जो कुछ होगा वो होगा। वहीं राम गहन प्रजापति का कहना है कि बीएचयू के डॉक्टरों ने चार जनवरी को उन्हें बुलाया है, अब देखते हैं क्या होता है।
इस बारे में विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डॉ. राजेश सिंह का कहना है कि किसी भी मरीज को रेफर नहीं किया गया। वे अपनी स्वेच्छा से बाहर इलाज कराने के लिए गए हैं।
जो मरीज बीएचयू से अपना इलाज करवाना चाहता है विश्वविद्यालय की ओर से उस मरीज की हर संभव मदद की जाएगी।