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BHU Research: दुनिया के लिए संजीवनी बनेगी हर्बल एंटीबायोटिक दवा, संक्रामक बीमारियों को रोकने में बेहद कारगर

Thu, 29 Jun 2023 05:36 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Thu, 29 Jun 2023 05:36 PM IST
सार

कोरोना काल के बाद से संक्रामक बीमारियां बढ़ी हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का असर कम हो रहा है। ऐसे में बीएचयू आयुर्वेद संकाय में तुलसी और रजत भस्म से हर्बल एंटीबायोटिक दवा आरोग्य-5 तैयार की गई है। यह दवा व्यक्ति को संक्रमित करने वाले जीवाणुओं को मारने में सहायक होगी।

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BHU Research Herbal antibiotic medicine will become Sanjeevani for world
बैक्टीरिया पर एंटीबायोटिक बेअसर - फोटो : Istock

विस्तार

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय में तुलसी और रजत भस्म से हर्बल एंटीबायोटिक दवा आरोग्य-5 तैयार की गई है। यह दवा व्यक्ति को संक्रमित करने वाले जीवाणुओं को मारने में सहायक होगी। बीमारियों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

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आयुर्वेद संकाय के रसशास्त्र विभाग के प्रो. आनंद चौधरी के निर्देशन में चल रहे शोध में प्राथमिक स्तर पर सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब डॉ. प्रिया मोहन शोध को आगे बढ़ा रही हैं। प्रो. आनंद चौधरी के मुताबिक कोरोना काल के बाद से संक्रामक बीमारियां बढ़ी हैं।
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इन पर हर्बल एंटीबायोटिक दवाओं का कितना असर हो रहा है, यह जानने के लिए तुलसी और रजत भस्म के प्रयोग से हर्बल एंटीबायोटिक दवा तैयार की गई। इसके प्रारंभिक नतीजे सामने आए हैं। पता चला है कि दवा की मदद से संक्रामक बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं को खत्म किया जा सकता है।
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माइक्रोबायोलॉजी लैब में प्रो. गोपाल नाथ की अगुवाई में इस दवा के प्रभाव की जांच लगातार की जा रही है। इसमें दो तरह के जीवाणुओं को लिया गया है। ग्राम पॉजिटिव और ग्राम निगेटिव। दोनों पर अलग-अलग असर देखने को मिले हैं। दवा का असर ग्राम निगेटिव जीवाणु पर ज्यादा देखने को मिला है। ग्राम निगेटिव जीवाणु एंटीबॉडी के प्रति अधिक प्रतिरोधी होते हैं। यह दवा जीवाणुओं को मारने और उसका प्रभाव कम करने में ज्यादा कारगर है।

बीमारियों के उपचार में पौधों का 80 फीसदी लोग करते हैं उपयोग

प्रो.आनंद चौधरी के अनुसार डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 80 फीसदी लोग कई बीमारियों के इलाज के लिए तुलसी सहित अन्य पौधों का उपयोग करते हैं। पौधों में मौजूद फाइटोकेमिकल्स को सिंथेटिक दवाओं के विकल्प के रूप में उपयोग किए जाने की क्षमता है। जैसे नीम को ग्राम फार्मेसी या प्रकृति की दवा की दुकान के रूप में जाना जाता है। तुलसी को प्रकृति की मां औषधि कहा जाता है।

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