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बीएचयू: एमए फर्स्ट सेमेस्टर राजनीति शास्त्र का पर्चा बना चर्चा का विषय
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 08 Dec 2017 01:47 PM IST
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राजनीतिशास्त्र के पेपर में जीएसटी पर सवाल से चौके छात्र
- फोटो : facebook
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बीएचयू में एमए फर्स्ट सेमेस्टर राजनीति शास्त्र की परीक्षा में ऐसा प्रश्न पूछा गया जिससे सारे छात्र हैरान रह गए। गुरुवार को राजनीतिशास्त्र के पेपर में जीएसटी संबंधित सवाल पूछे गए थे। इस सवाल को लेकर विद्यार्थियों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही सेमेस्टर परीक्षा में कौटिल्य की नजर में जीएसटी पर सवाल पूछा गया, जिसको लेकर परीक्षार्थियों का दिमाग चकरा गया।
यहीं नहीं परिसर में यह घटना चर्चा का केंद्र बनी है। एमए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में यह सवाल पूछा गया कि चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में आर्थिक सलाहकार कौटिल्य की नजरों में जीएसटी का क्या मतलब था?।
छात्रों को इस सवाल का जवाब निबंध के रुप में लिखना था। छात्रों को जब पेपर मिला तो वह समझ नहीं सके। ऐसा इसलिए कि जीएसटी तो केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में लागू किया और सवाल में मौर्य काल से जोड़कर जीएसटी के बारे में पूछा गया।
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पूरे मामले में विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी सिंह का कहना है कि सवाल में शब्द से अधिक उसके भाव को समझना चाहिए। उन्होंने जीएसटी के सवाल को कौटिल्य के समय की कर प्रणाली से जोड़ते हुए बताया।
उदाहरण यह भी दिया किताब में नीति आयोग का उल्लेख नहीं है लेकिन पढ़ते समय पुराने नाम योजना आयोग की जगह नीति आयोग के बारे में भी ही जानकारी दी जाती है।
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यहीं नहीं परिसर में यह घटना चर्चा का केंद्र बनी है। एमए प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में यह सवाल पूछा गया कि चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में आर्थिक सलाहकार कौटिल्य की नजरों में जीएसटी का क्या मतलब था?।
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छात्रों को इस सवाल का जवाब निबंध के रुप में लिखना था। छात्रों को जब पेपर मिला तो वह समझ नहीं सके। ऐसा इसलिए कि जीएसटी तो केंद्र सरकार ने अभी हाल ही में लागू किया और सवाल में मौर्य काल से जोड़कर जीएसटी के बारे में पूछा गया।
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पूरे मामले में विभागाध्यक्ष प्रो. आरपी सिंह का कहना है कि सवाल में शब्द से अधिक उसके भाव को समझना चाहिए। उन्होंने जीएसटी के सवाल को कौटिल्य के समय की कर प्रणाली से जोड़ते हुए बताया।
उदाहरण यह भी दिया किताब में नीति आयोग का उल्लेख नहीं है लेकिन पढ़ते समय पुराने नाम योजना आयोग की जगह नीति आयोग के बारे में भी ही जानकारी दी जाती है।