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BHU News: पढ़े-लिखों के बीच मतदान कराना नहीं आसान, 2019 का वोट प्रतिशत जान हो जाएंगे हैरान
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सर्वविद्या की राजधानी काशी की पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) है। बावजूद इसके वर्ष 2019 के आम चुनाव में बीएचयू परिसर में बने मतदान केंद्र पर 36.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में 39 प्रतिशत मतदान हुआ था। यह स्थिति तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 10 वर्षों के कार्यकाल में बीएचयू को कई सौगातें भी दी हैं। मगर, जब आम चुनाव होता है तो मतदान के दौरान सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों के परिसर बीएचयू से जिला निर्वाचन कार्यालय को निराशा ही हाथ लगती है। ऐसे में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएचयू में मतदान प्रतिशत बढ़ाना जिला निर्वाचन कार्यालय के एक बड़ी चुनौती है।
विधानसभा चुनावों में भी बीएचयू परिसर में मतदान की स्थिति कमोबेश यही रहती है। जिला निर्वाचन अधिकारी एस. राजलिंगम का कहना है कि इस बार बीएचयू में प्रभावी तरीके से अभियान चलाकर मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाएगा। बीएचयू के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ज्यादा से ज्यादा मतदान करें, इसके लिए हरसंभव उपाय किए जाएंगे।
13 हजार से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ
बीएचयू में 2500 टीचिंग स्टाफ और तकरीबन 10000 नॉन टीचिंग स्टाफ हैं। इसी तरह से आईआईटी-बीएचयू में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की संख्या 690 से ज्यादा हैं। इतने मतदाता किसी भी चुनाव में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके बावजूद बीएचयू में मतदान प्रतिशत में कमी निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के साथ ही सियासी दलों के लिए भी चिंता का कारण बना रहता है।
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विधानसभा चुनावों में भी बीएचयू परिसर में मतदान की स्थिति कमोबेश यही रहती है। जिला निर्वाचन अधिकारी एस. राजलिंगम का कहना है कि इस बार बीएचयू में प्रभावी तरीके से अभियान चलाकर मतदान प्रतिशत बढ़ाया जाएगा। बीएचयू के टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ ज्यादा से ज्यादा मतदान करें, इसके लिए हरसंभव उपाय किए जाएंगे।
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13 हजार से ज्यादा टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ
बीएचयू में 2500 टीचिंग स्टाफ और तकरीबन 10000 नॉन टीचिंग स्टाफ हैं। इसी तरह से आईआईटी-बीएचयू में टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ की संख्या 690 से ज्यादा हैं। इतने मतदाता किसी भी चुनाव में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके बावजूद बीएचयू में मतदान प्रतिशत में कमी निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के साथ ही सियासी दलों के लिए भी चिंता का कारण बना रहता है।
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