बीएचयू का एमसीएच विंग बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, एक ही छत के नीचे जच्चा-बच्चा को मिलेंगी सुविधाएं
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बीएचयू में बन रहे माडर्न मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (MCH) विंग को बनारस का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का रूप दिया जाएगा। लेकिन, एमसीएच के निर्माण का काम अधर में लटक गया है। पिछले साल अप्रैल महीने से शुरू 100 बेड के निर्माण कार्य के पूरा होने की अंतिम तिथि 14 जुलाई है लेकिन अब तक तो यहां बिल्डिंग ही पूरी नहीं बन पाई है।
एमसीएच विंग की इंचार्ज प्रो. मधु जैन ने बताया कि इस विंग का उद्देश्य है कि मां और शिशु को स्वास्थ्य सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिले। साथ ही शिशु मृत्यु दर को कम करना भी है। जिन शिशुओं को मां के दूध की आवश्यकता होगी उसे भी पूरा किया जाएगा।
इसके साथ ही माडर्न मैटरनल एंड चाइल्ड हेल्थ (MCH) विंग को काशी का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में जाना जाएगा। साथ ही बीएचयू में एम्स की तरह आईवीएफ सेंटर भी बन रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल महिलाओं और नवजात बच्चों के बेहतर इलाज के लिए चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के बगल में एमसीएच विंग का काम 15 अप्रैल 2018 से ही चल रहा है।
24 करोड़ 82 लाख 43 हजार 56 रुपये की लागत से बनने वाले एमसीएच विंग का काम समय से हो जाए इसके लिए दो बार प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह समेत प्रमुख सचिव स्वास्थ्य भी यहां का दौरा कर चुके हैं। अब तक यहां केवल बाहर से तो बिल्डिंग ही बन पाई है, अंदर भी काम पूरा नहीं हो पाया है। यहां तक कि अभी ऊपरी हिस्से पर भी काम ही चल रहा है।