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BHU Hospital: पहली बार डॉक्टरों ने बिना ओपन हार्ट सर्जरी के किया वॉल्व प्रत्यारोपण, अस्पताल से मिल गई छुट्टी

Fri, 28 Feb 2025 03:49 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 28 Feb 2025 03:49 PM IST
सार

आईएमएस बीएचयू के डॉक्टरों ने पहली बार 65 वर्षीय मरीज का बिना ओपन हार्ट सर्जरी के वॉल्व प्रत्यारोपण किया। मरीज बाइसपिड एओर्टिक वॉल्व से पीड़ित था, जिसमें गंभीर संकुचन (स्टीनोसिस) था। 

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BHU hospital doctors performed valve transplant without open heart surgery for first time
IMS BHU - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आईएमएस बीएचयू के हृदय रोग विभाग में डॉक्टरों की टीम ने 65 वर्षीय एक वृद्ध मरीज का वॉल्व प्रत्यारोपण किया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब बिना ओपन हार्ट सर्जरी के किसी मरीज का प्रत्यारोपण किया गया है। मरीज स्वस्थ है और उसको अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है। मरीज बाइसपिड एओर्टिक वॉल्व से पीड़ित था, जिसमें गंभीर संकुचन (स्टीनोसिस) था।

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कार्डियोलॉजी विभाग के प्रो. विकास अग्रवाल ने बताया कि यह केस संरचनात्मक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एओर्टिक वॉल्व हृदय के बाईं तरफ स्थित होता है। जो एओर्टा (मुख्य धमनी) को नियंत्रित करता है और शरीर को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करता है। यदि एओर्टिक वॉल्व में किसी तरह का अवरोध आ जाए, तो शरीर में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे मरीज को सीने में दर्द, थकान और बेहोशी (सिंकोप) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

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सीटीवीएस विभागाध्यक्ष प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया ने बताया कि एओर्टिक वॉल्व में रुकावट दो प्रकार की, जन्मजात और उम्र संबंधी होती है। वृद्धावस्था में एओर्टिक वॉल्व के सख्त (स्क्लेरोसिस) होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो सकती है। यदि समय पर इसका उपचार न किया जाए, तो यह मौत का कारण बन सकती है।

वृद्ध मरीजों में वॉल्व प्रत्यारोपण करना तकनीकी रूप से जटिल होता है। हालांकि ओपन-हार्ट सर्जरी अब भी एक विकल्प है। संस्थान के निदेशक प्रो. एसएन संखवार और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रो. केके गुप्ता ने प्रत्यारोपण के लिए टीम को बधाई दी है।

इस टीम ने किया प्रत्यारोपण
कार्डियोलॉजी विभाग से प्रो. विकास अग्रवाल, डॉ. प्रतिभा राय, डॉ. सुयश त्रिपाठी, प्रो. एपी सिंह, डॉ. संजीव, डॉ. प्रतिभा (कार्डियक एनेस्थीसिया विभाग) और प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया (सीटीवीएस विभाग) ने मिलकर मरीज का वॉल्व प्रत्यारोपण किया।

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