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हिंदी दिवस पर प्रचार प्रसार का संकल्प
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वाराणसी। हिंदी दिवस पर बीएचयू, आईआईटी बीएचयू समेत अन्य जगहों पर आयोजित कार्यक्रमों में वक्ताओं ने हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के साथ ही इसका प्रचार-प्रसार करने का संकल्प लिया। आईआईटी बीएचयू में हुए ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. सतीश देशपांडे ने कहा कि भाषा एक संस्कार है और यह केवल ध्वनि संकेत लिपि नहीं है। उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में होनी चाहिए।
संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति से छात्रों को काफी फायदा होगा। प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने से छात्रों का सर्वांगीण विकास भी होगा। संस्थान के कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने कार्यक्रम की जानकारी दी, जबकि प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का संदेश पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम में प्रो. संजय पांडेय, राजन श्रीवास्तव, प्रो. एके त्रिपाठी, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. आरिफ जमाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
महामना पहचानते थे हिंदी का सामर्थ्य
बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि हिंदी की सामर्थ्य को विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने पहले ही पहचान लिया था और इस बात पर जोर दिया था कि जन सामान्य की शिक्षा का माध्यम कभी भी विदेशी भाषा नहीं हो सकती है। कुलपति ने अधिक से अधिक लोगों को हिंदी में काम करने की अपील भी की।
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संस्थान के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति से छात्रों को काफी फायदा होगा। प्रारंभिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने से छात्रों का सर्वांगीण विकास भी होगा। संस्थान के कुलसचिव डॉ. एसपी माथुर ने कार्यक्रम की जानकारी दी, जबकि प्रो. सुशांत कुमार श्रीवास्तव ने शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का संदेश पढ़कर सुनाया। कार्यक्रम में प्रो. संजय पांडेय, राजन श्रीवास्तव, प्रो. एके त्रिपाठी, प्रो. प्रभाकर सिंह, प्रो. आरिफ जमाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
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महामना पहचानते थे हिंदी का सामर्थ्य
बीएचयू के कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने कहा कि हिंदी की सामर्थ्य को विश्वविद्यालय के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने पहले ही पहचान लिया था और इस बात पर जोर दिया था कि जन सामान्य की शिक्षा का माध्यम कभी भी विदेशी भाषा नहीं हो सकती है। कुलपति ने अधिक से अधिक लोगों को हिंदी में काम करने की अपील भी की।
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