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BHU: महामना की बगिया में बिखरेंगे मिथिला की कला, संस्कृति के रंग, खुलेगा मैथिली अध्ययन केंद्र

Sun, 13 Dec 2020 12:37 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sun, 13 Dec 2020 12:37 PM IST
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BHU: bhu administration start maithili Learning Center student will study art of Mithila culture in mahamana ki bagia
बीएचयू, मधुनवी केंद्र में बनी पेंटिंग। - फोटो : अमर उजाला।

मैथिली लोक, कला संस्कृति और उसकी परंपराओं से देश भर के छात्र-छात्राओं को जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसके लिए काशी हिंदू विश्वविद्लाय (बीएचयू) में मैथिली अध्ययन केंद्र खोला जा रहा है। कला संकाय के तहत चलने वाले मैथिली अध्ययन केंद्र में मैथिली भाषा साहित्य, कला, संस्कृति की पढ़ाई तो होगी, साथ ही वहां की चित्रकला, मैथिली डायस्पोरा, अनुवाद का भी अध्ययन छात्र कर सकेंगे। पहले चरण में अगले सत्र से यहां शोध कार्य शुरू होगा लेकिन आने वाले दिनों में डिग्री और डिप्लोमा कोर्स भी चलाया जाएगा।

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना में मैथिली समाज से जुड़े महापुरुषों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। साथ ही काशी में मैथिली परंपरा को मानने वाले लोग भी अधिक हैं। इसी उद्देश्य से बीएचयू में मैथिली अध्ययन केंद्र खोले जाने का प्रस्ताव पिछले दिनों वसंत कन्या महाविद्यालय राजघाट की शिक्षक और बीएचयू में कोर्ट की सदस्य डॉ. वंदना झा ने रखा था। पहले विद्वत परिषद और फिर कार्यकारिणी परिषद से इसकी मंजूरी मिली। अब मैथिली अध्ययन केंद्र चलाए जाने के फैसले के बाद इस दिशा में कार्रवाई तेज हो गई है।
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बीएचयू की ओर से कला संकाय प्रमुख को समन्वयक बनाया गया है। जबकि डॉ. वंदना झा को सह समन्वयक की जिम्मेदारी दी गई है। अब अध्ययन केंद्र से संचालित होने वाले शोध, डिप्लोमा कोर्स की रूप रेखा तैयार कराई जा रही है, इसे भी विद्वत परिषद की बैठक में रखा जाएगा।

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अंर्तविर्षयक शोध अध्ययन केंद्र का उद्देश्य
मैथिली अध्ययन केंद्र की स्थापना का उद्देश्य मिथिला की विपुल विरासत का अध्ययन करना है। देश की सांस्कृतिक विरासत को मजबूती प्रदान करने में भी मैथिली संस्कृति की अहम भूमिका रही है। केंद्र के तहत इसका भी अध्ययन कराया जाएगा। सह समन्वयक डॉ. वंदना झा के अनुसार, अंतर्विषयक शोध भी कराया जाएगा। जिससे कि भूगोल, समाजशास्त्र, इतिहास, कला के साथ ही आईआईटी के छात्र भी अध्ययन केंद्र से जुड़कर शोध कार्य कर सकें। इसमें मिथिला की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक दृष्टिकोण, कला, संस्कृति, ऐतिहासिक महत्व को जोड़ा जाएगा।
 

इन विषयों पर होगा शोध 

नदी साहित्य
मिथिला में कोसी, कमला, गंडकी, बनारस सहित 15 नदियां मिलती हैं। इसके लाभ और इसकी विभीषिका पर भी अध्ययन होगा। 

मिथिला कृषि
मिथिला में कपास की खेती भी होती है। ऐसे में छात्रों को मैथिली में कृषि के बारे में भी बताया जाएगा।

मैथिली खादी
मैथिली के वस्त्रों की भी अपनी एक अलग पहचान है। छात्र मिथिला के वस्त्रों पर भी शोध कर सकेंगे। 

मैथिली कला पेंटिंग
मधुबनी पेंटिंग, कला, परंपरा भी शोध का विषय होगा।  
इसके अलावा फिल्म, पत्रकारिता, अनुवाद, शब्दकोष निर्माण, पारिस्थितिकी अध्ययन, कृषि संस्कृति का अध्ययन कराया जाएगा। 

काशी सदैव से मिथिलावासियों के लिए ज्ञान का केंद्र रही है। मैथिल विद्वानों ने अपनी पांडित्य परंपरा से काशी को समृद्ध किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के 100 साल से अधिक के सफर में मैथिली को उचित स्थान देने की आवश्यकता थी जिसे पूरा किया गया। मैथिली संस्कृति, भाषा की विरासत जो पूरे देश में फैली है, उसको भी अध्ययन केंद्र के माध्यम से संजोए जाने का प्रयास होगा। - डॉ. वंदना झा, सह समन्वयक, मैथिली अध्ययन केंद्र

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